शारदीय नवरात्र 2026: डोंगरगढ़ में मां बमलेश्वरी के दरबार में उमड़ी भक्तों की भीड़, सनातन और आदिवासी संस्कृति का अद्भुत संगम
शारदीय नवरात्र 2026: छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में स्थित धर्मनगरी डोंगरगढ़ अपनी अलौकिक सुंदरता और धार्मिक महत्व के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है. यहां पहाड़ों की चोटी पर बड़ी मां बमलेश्वरी का भव्य दरबार सुशोभित है, जबकि नीचे छोटी मां का मंदिर भक्तों को दर्शन देता है. सड़क मार्ग, रेल सुविधा और आधुनिक रोपवे जैसी बेहतरीन व्यवस्थाओं से लैस यह धाम नवरात्र के दिनों में देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का मुख्य केंद्र बन जाता है.

901 मनोकामना ज्योति कलशों के विसर्जन की अनूठी परंपरा
नवरात्र पर्व के दौरान डोंगरगढ़ में प्रज्वलित होने वाली मनोकामना ज्योत इस धाम की सबसे बड़ी विशेषता है. मान्यता है कि भक्त अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए माता के दरबार में श्रद्धा के दीप जलाते हैं. नौ दिनों तक जलने वाली इन ज्योतियों का नवमी के दिन विधि-विधान के साथ विसर्जन किया जाता है, जिसमें 901 ज्योति कलशों को कतारबद्ध तरीके से प्राचीन महावीर मंदिर तालाब तक ले जाया जाता है, जो श्रद्धालुओं को पूरी तरह भावविभोर कर देता है.

1100 सीढ़ियों की चढ़ाई और आधुनिक रोपवे की सुविधा
बड़ी मां के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को लगभग 1100 सीढ़ियों का कठिन रास्ता तय करना पड़ता है, जो उनके अदम्य संकल्प और भक्ति को दर्शाता है. वहीं, बुजुर्गों और सीढ़ियां चढ़ने में असमर्थ भक्तों की सुविधा के लिए मंदिर ट्रस्ट समिति द्वारा आधुनिक रोपवे का संचालन किया जाता है. प्रबंधन ने हाल ही में सुरक्षा और तकनीकी व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए विशेष कार्य किए हैं, ताकि हर श्रद्धालु सुगमता से माता के दर्शन कर सके.

सनातन परंपरा और आदिवासी संस्कृति का अनूठा मिलन
डोंगरगढ़ के इस पावन धाम की एक और खास बात यहां दिखने वाला सांस्कृतिक समन्वय है. नवरात्र के दौरान आयोजित होने वाली ‘पंचमी भेंट’ इस परंपरा का सबसे बड़ा उदाहरण है, जिसमें प्रदेशभर से आदिवासी समाज के बैगा और प्रतिनिधि माता के दरबार पहुंचते हैं. राज बैगा के नेतृत्व में आंगा देव और मां बमलेश्वरी का यह मिलन सनातन पूजा-पद्धति और प्राचीन लोक परंपराओं के बीच एक अनूठा सांस्कृतिक संगम प्रस्तुत करता है.

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