Raipur Jagannath Rath Yatra: 2 सोने की झाड़ुओं से होती है रथ मार्ग की सफाई, जानिए अनोखी परंपरा
Raipur Jagannath Rath Yatra: रायपुर में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा केवल धार्मिक आस्था का ही नहीं, बल्कि एक अनोखी परंपरा का भी प्रतीक है. यहां रथयात्रा से पहले महाप्रभु के रथ मार्ग की सफाई साधारण झाड़ू से नहीं, बल्कि करीब सवा किलो वजनी दो सोने की झाड़ुओं से की जाती है. ये झाड़ू पूरे साल सुरक्षित तिजोरी में रखी जाती हैं और केवल रथयात्रा के दिन ही बाहर निकाली जाती हैं.

राज्यपाल और मुख्यमंत्री निभाते हैं छेरापहरा की परंपरा
रायपुर के अवंति विहार, गायत्री नगर स्थित जगन्नाथ मंदिर में वर्ष 2003 से पुरी धाम की तर्ज पर रथयात्रा निकाली जा रही है. रथयात्रा से पहले होने वाली छेरापहरा रस्म सबसे बड़ा आकर्षण होती है, इस परंपरा के तहत एक सोने की झाड़ू राज्यपाल और दूसरी मुख्यमंत्री के हाथ में होती है. दोनों महाप्रभु के रथ के आगे प्रतीकात्मक रूप से मार्ग की सफाई कर भगवान के प्रति सेवा और समर्पण का संदेश देते हैं.

पुरी की परंपरा का होता है पालन
मंदिर समिति के अध्यक्ष और विधायक पुरंदर मिश्रा ने बताया कि ओडिशा के पुरी धाम में गजपति महाराज जिस तरह सोने की झाड़ू से भगवान जगन्नाथ के रथ का मार्ग साफ करते हैं, उसी परंपरा का पालन रायपुर में भी किया जाता है, मंदिर के पास करीब सवा किलो वजन की दो सोने की झाड़ू सुरक्षित रखी गई हैं, जिनका उपयोग केवल रथयात्रा के दौरान ही किया जाता है.
ओडिशा के कलाकारों ने सजाया मंदिर और रथ
रथयात्रा की तैयारियों के लिए ओडिशा से आए कलाकार पारंपरिक शैली में जगन्नाथ मंदिर और रथों की आकर्षक सजावट कर रहे हैं. मंदिर की दीवारों, प्रवेश द्वार और रथों को रंग-बिरंगी धार्मिक चित्रकारी और पारंपरिक अलंकरण से सजाया जा रहा है, इसके साथ ही भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की पूजा-अर्चना एवं सभी धार्मिक अनुष्ठानों को विधि-विधान से संपन्न कराने के लिए ओडिशा से पुजारियों को भी आमंत्रित किया गया है.
500 साल पुराना है टुरी-हटरी का जगन्नाथ मंदिर
रायपुर की पुरानी बस्ती स्थित टुरी-हटरी का जगन्नाथ मंदिर शहर के सबसे प्राचीन मंदिरों में गिना जाता है. करीब 500 वर्ष पुराने इस मंदिर को पहले ‘साहूकार मंदिर’ के नाम से जाना जाता था. बाद में भगवान जगन्नाथ की प्रतिमा स्थापित होने के बाद इसकी पहचान जगन्नाथ मंदिर के रूप में बनी.
एक ही परिसर में कई मंदिर
टुरी-हटरी स्थित मंदिर परिसर में भगवान जगन्नाथ के अलावा श्रीराम दरबार, दो शिव मंदिर, संतोषी माता मंदिर, गरुड़ मंदिर और संकटमोचन हनुमान मंदिर भी स्थापित हैं. यही कारण है कि यह मंदिर पूरे वर्ष श्रद्धालुओं की आस्था और धार्मिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बना रहता है.




