Bastar Goncha Mahaparv 2026: नेत्रोत्सव के साथ गोंचा महापर्व की शुरुआत, आज दिव्य दर्शन, कल निकलेगी भव्य रथयात्रा
Bastar Goncha Mahaparv 2026: बस्तर की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान माने जाने वाले गोंचा महापर्व का शुभारंभ नेत्रोत्सव के साथ हो गया है. जगदलपुर के ऐतिहासिक जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ के दिव्य नेत्रोत्सव का आयोजन पूरे विधि-विधान और श्रद्धा के साथ संपन्न हुआ. अब श्रद्धालु कल निकलने वाली भव्य रथयात्रा का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं.

अनशन काल के बाद हुए भगवान के दिव्य दर्शन
नेत्रोत्सव के अवसर पर अनशन काल के बाद भगवान जगन्नाथ को आकर्षक श्रृंगार से सजाकर श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए विराजमान किया गया. सुबह से ही मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और भगवान जगन्नाथ, बलभद्र, सुभद्रा तथा महालक्ष्मी के दिव्य स्वरूप के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया.

रथयात्रा से पहले का सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान
नेत्रोत्सव को गोंचा महापर्व का सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान माना जाता है. मान्यता है कि इसी के अगले दिन भगवान जगन्नाथ अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ रथ पर सवार होकर नगर भ्रमण के लिए निकलते हैं, ताकि हर वर्ग और हर समुदाय के लोग उनके दर्शन कर सकें.

सदियों पुरानी परंपरा आज भी जीवंत
बस्तर में गोंचा महापर्व को पुरी की रथयात्रा की परंपरा का स्वरूप माना जाता है. यहां यह उत्सव सदियों से धार्मिक आस्था और सामाजिक समरसता के साथ मनाया जा रहा है. आयोजन में 360 आरण्यक ब्राह्मण, उत्कल ब्राह्मण और आदिवासी समाज सहित सभी वर्गों की सक्रिय भागीदारी रहती है, जो इस पर्व को विशेष बनाती है.
आस्था और संस्कृति का अनूठा संगम
भगवान जगन्नाथ, बलभद्र, सुभद्रा और महालक्ष्मी के विग्रहों के साथ निकलने वाला यह महापर्व बस्तर की सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकता का प्रतीक माना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि कलियुग में भगवान जगन्नाथ स्वयं अपने भक्तों के बीच आकर उन्हें दर्शन देते हैं और उनकी आस्था को साकार करते हैं.
कल निकलेगी भव्य रथयात्रा
नेत्रोत्सव के सफल आयोजन के बाद अब जगदलपुर में गोंचा महापर्व की सबसे प्रमुख आकर्षण रथयात्रा की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं. कल भगवान जगन्नाथ भव्य रथ पर सवार होकर नगर भ्रमण करेंगे, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है.


