CG News: विश्व पर्यावरण दिवस 2026: हरियाली, जल संरक्षण और जनभागीदारी से पर्यावरणीय समृद्धि की ओर बढ़ता छत्तीसगढ़
CG News: विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के संतुलित मॉडल के रूप में उभर रहा है। राज्य सरकार हरित विकास, जल संरक्षण और जनभागीदारी को केंद्र में रखकर ऐसी योजनाएं संचालित कर रही है, जो पर्यावरणीय सुरक्षा के साथ आर्थिक समृद्धि का मार्ग भी प्रशस्त कर रही हैं।
हरियाली से किसानों को मिल रहा लाभ
राज्य में ‘हरियाली प्रसार योजना’ और ‘किसान वृक्ष मित्र योजना’ के माध्यम से किसानों को कृषि वानिकी के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। किसानों को पौधे उपलब्ध कराकर उनकी भूमि पर वृक्षारोपण बढ़ाया जा रहा है, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ भविष्य में अतिरिक्त आय के अवसर भी सृजित हो रहे हैं।
‘एक पेड़ मां के नाम’ बना जनआंदोलन
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर चलाया जा रहा ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान लोगों को भावनात्मक रूप से प्रकृति से जोड़ रहा है। लाखों लोग अपनी मां के सम्मान में पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रहे हैं और इसे सामाजिक आंदोलन का स्वरूप दे रहे हैं।
शहरों को मिल रही नई हरित पहचान
तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच ‘ऑक्सीवन योजना’ और पर्यावरण वानिकी कार्यक्रमों के जरिए शहरों में ऑक्सीजन पार्क, हरित क्षेत्र और पर्यावरण पार्क विकसित किए जा रहे हैं। सड़क किनारे वृक्षारोपण और सार्वजनिक स्थलों का सौंदर्यीकरण शहरों को स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण प्रदान कर रहा है।
जल संरक्षण बना जनभागीदारी का अभियान
‘मोर गांव-मोर पानी’ और ‘मोर गांव-मोर तरिया’ जैसे अभियान ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण की नई चेतना जगा रहे हैं। तालाबों के पुनर्जीवन, वर्षा जल संचयन, चेक डैम निर्माण और जल पुनर्भरण संरचनाओं के जरिए जल सुरक्षा को मजबूत किया जा रहा है, राज्य में नदी तट वृक्षारोपण योजना के तहत नदियों के किनारे बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया जा रहा है। वहीं महानदी जलग्रहण क्षेत्र में आर्द्रभूमियों के संरक्षण और पुनर्जीवन का कार्य भी जारी है, जिससे जैव विविधता और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती मिल रही है।
नई पीढ़ी बन रही पर्यावरण की प्रहरी
राष्ट्रीय हरित कोर योजना और ईको-क्लब कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों को पर्यावरणीय गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। वृक्षारोपण, स्वच्छता, जल संरक्षण और जैव विविधता से जुड़े कार्यक्रमों के जरिए बच्चों और युवाओं में प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित की जा रही है, विशेषज्ञों का मानना है कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है। जल बचत, पौधारोपण, प्लास्टिक के उपयोग में कमी और प्राकृतिक संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग जैसे छोटे कदम बड़े बदलाव ला सकते हैं। यही सोच छत्तीसगढ़ के विकास मॉडल की आधारशिला बन रही है।



