CG News: सिद्धखोल जलप्रपात बना मानसून का पसंदीदा पर्यटन स्थल, प्रकृति और आस्था का अनोखा संगम
CG News: छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में कसडोल मुख्यालय से करीब 10 किलोमीटर दूर स्थित सिद्धखोल जलप्रपात इन दिनों पर्यटकों की पहली पसंद बना हुआ है. घने जंगलों के बीच स्थित यह प्राकृतिक स्थल मानसून के मौसम में और भी मनमोहक दिखाई देता है. चारों ओर हरियाली, शांत वातावरण और बहते झरने की आवाज यहां आने वालों को प्रकृति के बेहद करीब होने का एहसास कराती है.

40 फीट की ऊंचाई से गिरता है झरना
सिद्धखोल जलप्रपात की सबसे बड़ी खासियत इसका लगभग 40 फीट की ऊंचाई से गिरता पानी है. बारिश के दिनों में झरने का जलप्रवाह तेज हो जाता है, जिससे इसका नजारा और भी आकर्षक बन जाता है. प्रदेश के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में पर्यटक यहां प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेने पहुंचते हैं.

वॉच टॉवर से दिखता है शानदार नजारा
पर्यटकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए वन विभाग ने यहां वॉच टॉवर, विश्राम कुटी, शौचालय और पेयजल जैसी सुविधाएं विकसित की हैं. सुरक्षा के लिए परिसर को सुरक्षित घेराबंदी भी की गई है. वॉच टॉवर पर चढ़कर आसपास के घने जंगलों और जलप्रपात का मनोरम दृश्य देखा जा सकता है.
सिद्धबाबा मंदिर में भी उमड़ती है आस्था
जलप्रपात परिसर में स्थित सिद्धबाबा मंदिर श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है. यहां आने वाले लोग प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेने के साथ मंदिर में दर्शन कर भगवान सिद्धबाबा का आशीर्वाद भी प्राप्त करते हैं. यही वजह है कि यह स्थान पर्यटन और धार्मिक आस्था, दोनों का महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है.
इको-टूरिज्म के रूप में किया जा रहा विकास
सिद्धखोल जलप्रपात को इको-टूरिज्म के रूप में विकसित करने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं. वर्तमान में वन प्रबंधन समिति यहां की देखरेख कर रही है. पर्यटकों से प्रवेश शुल्क के रूप में 10 रुपये लिए जाते हैं. इसके अलावा स्थानीय लोगों की आय बढ़ाने के लिए दोना-पत्तल निर्माण जैसी गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है. सरकार और वन विभाग का उद्देश्य इस प्राकृतिक धरोहर को सुरक्षित रखते हुए पर्यटन को बढ़ावा देना है.

