CG News: छत्तीसगढ़ समेत देशभर में धान खरीदी की बदलेगी व्यवस्था, AI से होगी जांच और 100% ऑनलाइन सत्यापन
CG News: न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP पर होने वाली धान खरीदी में अनियमितताओं को रोकने के लिए केंद्र सरकार नई डिजिटल व्यवस्था लागू करने की तैयारी में है. देश के जिन राज्यों में MSP पर धान खरीदा जाता है, वहां पूरी प्रक्रिया की निगरानी तकनीक के जरिए मजबूत की जाएगी. इसके तहत इम्प्रूव्ड राइस मॉनिटरिंग डैशबोर्ड, AI आधारित साक्ष्यों की स्क्रीनिंग और खरीदे गए धान के 100 प्रतिशत ऑनलाइन भौतिक सत्यापन जैसी व्यवस्थाएं शुरू की जाएंगी.

1 सितंबर को खाद्य सचिवों की अहम बैठक
धान खरीदी की नई व्यवस्था को लेकर 1 सितंबर को देशभर के खाद्य सचिवों की महत्वपूर्ण बैठक होगी. इसमें खरीफ मार्केटिंग सीजन 2026-27 के लिए धान और चावल खरीदी की तैयारियों, लक्ष्य, खरीद अवधि और मिलिंग से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होगी. छत्तीसगढ़ धान उत्पादन और सरकारी खरीदी के लिहाज से प्रमुख राज्य है, इसलिए बैठक में राज्य की तैयारियों और नई तकनीकी व्यवस्था के अनुपालन पर विशेष ध्यान रहने की संभावना है.
भंडारण और सप्लाई चेन पर भी फोकस
बैठक में खाद्यान्न के भंडारण और वितरण व्यवस्था को बेहतर बनाने पर भी चर्चा होगी. प्रोक्योरमेंट ऑपरेशंस की सप्लाई चेन को मजबूत करने, अन्ना चक्र को SCMS और VLTS से जोड़ने तथा सार्वजनिक वितरण प्रणाली में खाद्यान्न की आवाजाही को डिजिटल तरीके से मॉनिटर करने जैसे मुद्दे एजेंडे में शामिल हैं. छत्तीसगढ़ में डिपो दर्पण और खाद्यान्न भंडारण से जुड़े दिशा-निर्देशों के पालन की भी समीक्षा की जा सकती है.
छत्तीसगढ़ में धान खरीदी का बड़ा कारोबार
छत्तीसगढ़ में राज्य गठन के बाद से MSP पर बड़े पैमाने पर धान खरीदी होती आ रही है. हजारों करोड़ रुपये की इस प्रक्रिया में हर साल धान की कमी, रिकॉर्ड में गड़बड़ी और दूसरी अनियमितताओं को लेकर सवाल उठते रहे हैं. पिछले खरीफ सीजन में खरीदे गए धान में करीब 68 हजार 500 मीट्रिक टन की कमी सामने आने की बात कही गई है, जिसे सूखत और अन्य कारणों से जोड़कर देखा गया है.
AI निगरानी से घोटालों पर लगाम की उम्मीद
राज्य सरकार किसानों से धान की खरीदी करीब 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से करती है, जिसमें केंद्र की MSP और राज्य की प्रोत्साहन राशि शामिल रहती है. धान में कमी या अन्य गड़बड़ी होने पर इसका वित्तीय भार सरकारी खजाने पर पड़ता है. अब AI स्क्रीनिंग, डिजिटल ट्रैकिंग और 100 प्रतिशत ऑनलाइन भौतिक सत्यापन जैसी व्यवस्था लागू होने से खरीदी प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है. इससे रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक के बीच अंतर पकड़ना आसान होगा और धान खरीदी में होने वाली गड़बड़ियों पर प्रभावी रोक लगाने में मदद मिल सकती है.
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