CG News: अंबिकापुर की सुभद्रा मंडल ने शुरू की खीरे की खेती, बिहान से मिली आर्थिक मदद बनी आत्मनिर्भरता की राह
CG News: ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में स्व-सहायता समूह अहम भूमिका निभा रहे हैं. छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान के जरिए महिलाओं को समूहों से जोड़कर ऋण और आजीविका से जुड़ी गतिविधियों के लिए सहयोग दिया जा रहा है. इसका लाभ लेकर महिलाएं खेती, पशुपालन, सब्जी उत्पादन और अन्य कामों के जरिए अपनी आमदनी बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं. ग्राम पंचायत सकालो की सुभद्रा मंडल की कहानी भी इसी बदलाव की मिसाल है.

1 लाख का ऋण लेकर शुरू की खीरे की खेती
सुभद्रा मंडल काली मां स्व-सहायता समूह से जुड़ी हुई हैं. समूह के माध्यम से उन्होंने 1 लाख रुपये का ऋण लिया और इस राशि को खेती में लगाकर एक एकड़ जमीन पर खीरे की फसल तैयार करने का काम शुरू किया. इससे पहले पूंजी की कमी के कारण वह बड़े स्तर पर खेती नहीं कर पा रही थीं. सीमित आमदनी के चलते खेती में अतिरिक्त निवेश करना मुश्किल था, लेकिन समूह से मिली ऋण सुविधा ने उन्हें अपनी कृषि गतिविधि बढ़ाने का अवसर दिया.
आर्थिक मदद के साथ बढ़ा आत्मविश्वास
सुभद्रा के मुताबिक, बिहान से जुड़ने के बाद उन्हें खेती को आय के साधन के रूप में आगे बढ़ाने का रास्ता मिला. ऋण की मदद से उन्होंने खीरे की खेती शुरू की और अब उत्पादन के जरिए परिवार की आमदनी बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं. उनके लिए यह आर्थिक सहायता सिर्फ पूंजी का साधन नहीं रही, बल्कि अपने दम पर कुछ नया करने का आत्मविश्वास भी बढ़ा है. खेती को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाकर वह परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करना चाहती हैं.
लखपति दीदी बनने का लक्ष्य
सुभद्रा मंडल का लक्ष्य खीरे की खेती से बेहतर आमदनी हासिल कर अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत करना है. वह खेती से होने वाली आय का एक हिस्सा आगे की आजीविका गतिविधियों में लगाने की योजना बना रही हैं. उनका कहना है कि लगातार मेहनत और सही दिशा में निवेश के जरिए वह भविष्य में आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनना चाहती हैं. साथ ही, उनकी इच्छा लखपति दीदी बनने की दिशा में आगे बढ़ने की है.
बिहान से ग्रामीण महिलाओं को मिल रहा अवसर
बिहान के जरिए ग्रामीण महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जोड़कर उन्हें आजीविका गतिविधियों के लिए संस्थागत सहयोग और ऋण की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है. स्थानीय जरूरत और क्षमता के अनुसार महिलाएं कृषि, पशुपालन, सब्जी उत्पादन सहित अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर रही हैं. सुभद्रा मंडल का उदाहरण बताता है कि समूह आधारित वित्तीय सहयोग और महिला की मेहनत मिलकर आय का नया रास्ता तैयार कर सकते हैं. एक एकड़ से शुरू हुई खीरे की खेती अब उनके परिवार के लिए अतिरिक्त आमदनी और आत्मनिर्भर भविष्य की उम्मीद बन रही है.
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