CG News: डिजिटल लॉकर में भविष्य,‘क्रेडिट बैंक’ में जमा होगी पढ़ाई
CG News: छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में डिजिटल क्रांति की नई शुरुआत हो चुकी है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत लागू ‘एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट’ (ABC) और डिजीलॉकर एकीकरण योजना ने राज्य के शिक्षा तंत्र को पूरी तरह बदल दिया है। अब छात्रों की पढ़ाई सिर्फ कॉलेज तक सीमित नहीं, बल्कि एक डिजिटल सिस्टम में सुरक्षित ‘क्रेडिट बैंक’ के रूप में संरक्षित हो रही है।
क्या है ‘क्रेडिट बैंक’ सिस्टम?
‘एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट’ एक ऐसी डिजिटल व्यवस्था है, जिसमें छात्रों के शैक्षणिक अंकों (क्रेडिट) को सुरक्षित रूप से संग्रहित किया जाता है। यदि किसी छात्र को किसी कारणवश अपनी पढ़ाई बीच में छोड़नी पड़े, तो उसकी मेहनत बेकार नहीं जाती।
उदाहरण के तौर पर, यदि कोई छात्र दो वर्ष की पढ़ाई पूरी करने के बाद पढ़ाई रोक देता है, तो उसके सभी क्रेडिट ABC ID के माध्यम से सुरक्षित रहेंगे। जब वह दोबारा पढ़ाई शुरू करता है, तो उसे सीधे अगले स्तर (जैसे थर्ड ईयर) में प्रवेश मिल सकता है। इसे ‘मल्टीपल एंट्री एंड एग्जिट सिस्टम’ कहा जाता है।
6.5 लाख छात्रों को मिला डिजिटल फायदा
छत्तीसगढ़ के सभी 33 जिलों में यह प्रणाली पूरी तरह लागू हो चुकी है। राज्य के 6.5 लाख से अधिक छात्र इस डिजिटल शिक्षा नेटवर्क से जुड़ चुके हैं।पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय (रायपुर), अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय (बिलासपुर) और शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय (बस्तर) सहित सभी शासकीय एवं निजी महाविद्यालय इस प्रणाली का हिस्सा बन चुके हैं।
डिजीलॉकर बना छात्रों का सुरक्षा कवच
डिजीलॉकर और नेशनल एकेडमिक डिपॉजिटरी (NAD) के एकीकरण से अब छात्रों के सभी शैक्षणिक दस्तावेज सीधे डिजिटल रूप में सुरक्षित हो रहे हैं।अब मार्कशीट, डिग्री और सर्टिफिकेट खोने या खराब होने की चिंता समाप्त हो गई है। ये डिजिटल दस्तावेज कानूनी रूप से मूल दस्तावेजों के बराबर मान्य हैं, जिससे छात्रों को नौकरी और उच्च शिक्षा में बड़ी सुविधा मिल रही है।
देशव्यापी अवसरों से जुड़ा छत्तीसगढ़ का युवा
ABC ID और क्रेडिट ट्रांसफर सिस्टम ने छात्रों के लिए पूरे देश में शिक्षा के नए रास्ते खोल दिए हैं। अब छात्र अपने क्रेडिट देश के किसी भी विश्वविद्यालय में ट्रांसफर कर सकते हैं।इससे न केवल शिक्षा में लचीलापन बढ़ा है, बल्कि ग्रामीण और शहरी छात्रों के बीच डिजिटल खाई भी काफी हद तक कम हुई है।
यह योजना सिर्फ तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के लाखों छात्रों के लिए एक डिजिटल भविष्य का द्वार है। ‘क्रेडिट बैंक’ और डिजीलॉकर का यह मॉडल शिक्षा को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और लचीला बना रहा है।
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