CG News: मनरेगा बना जल संरक्षण और रोजगार का आधार, ‘मोर गांव-मोर पानी’ अभियान से गांवों में समृद्धि की नई धारा
CG News: जलवायु परिवर्तन और बढ़ते जल संकट के दौर में छत्तीसगढ़ ने ‘मोर गांव-मोर पानी’ महाअभियान के जरिए जल संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़कर विकास का नया मॉडल प्रस्तुत किया है। 24 अप्रैल 2025 से शुरू हुए इस अभियान के माध्यम से जल संरक्षण, रोजगार सृजन और ग्रामीण विकास को एक साथ आगे बढ़ाया जा रहा है।
एक लाख से अधिक जल संरचनाएं
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत लगभग 1610 करोड़ रुपये की लागत से प्रदेशभर में एक लाख से अधिक जल संरक्षण एवं संवर्धन कार्य किए जा रहे हैं। इन स्थायी परिसंपत्तियों से जल सुरक्षा मजबूत होने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की नई संभावनाएं भी पैदा हुई हैं।

महिलाओं की बड़ी भागीदारी
अभियान के तहत प्रदेश में रोजाना 11 लाख से अधिक ग्रामीण श्रमिकों को रोजगार मिल रहा है। खास बात यह है कि इनमें 57 प्रतिशत महिलाएं शामिल हैं। इससे महिलाओं की आर्थिक भागीदारी और आत्मनिर्भरता को भी नई मजबूती मिल रही है।
बढ़ रही ग्रामीण आय
राज्य में 13,065 आजीविका डबरियों का निर्माण पूरा हो चुका है, जिससे ग्रामीण परिवारों को मत्स्य पालन, बागवानी और अन्य आयवर्धक गतिविधियों के अवसर मिल रहे हैं। वहीं ‘नवा तरिया-आय के जरिया’ योजना के तहत 624 सामुदायिक तालाब विकसित किए जा रहे हैं, जिनसे स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को स्थायी रोजगार के अवसर मिल रहे हैं।
मजबूत हुआ जल प्रबंधन
अभियान में आधुनिक तकनीकों का व्यापक उपयोग किया जा रहा है। GIS आधारित युक्तधारा प्लानिंग, CLART एप और वाटरशेड सिद्धांतों के जरिए जल संरक्षण कार्यों की वैज्ञानिक योजना बनाई जा रही है। वहीं ‘जलदूत’ प्रणाली के माध्यम से भू-जल स्तर की नियमित निगरानी भी की जा रही है।
पारदर्शिता और जनभागीदारी
प्रत्येक ग्राम पंचायत में क्यूआर कोड आधारित सूचना प्रणाली लागू की गई है, जिससे ग्रामीण स्वीकृत और पूर्ण कार्यों की जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकते हैं। रोजगार दिवस, सामाजिक अंकेक्षण और जनसंवाद कार्यक्रमों के जरिए योजना में पारदर्शिता और जनविश्वास को और मजबूत किया गया है, जनप्रतिनिधियों, पंचायतों, स्वयं सहायता समूहों, युवाओं और सामाजिक संगठनों की सक्रिय भागीदारी ने ‘मोर गांव-मोर पानी’ अभियान को जनआंदोलन का रूप दे दिया है। यह अभियान जल संरक्षण, रोजगार, महिला सशक्तिकरण और तकनीकी नवाचार का सफल मॉडल बनकर उभरा है।




