CG News: 26 सितंबर से शुरू होगा पितृपक्ष, बाजारों में सजी पूजा सामग्री की दुकानें
CG News: गणेश उत्सव के समापन के बाद अब पितृपक्ष की तैयारियां शुरू हो गई हैं. इस वर्ष पितृपक्ष 26 सितंबर से शुरू होकर 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ समाप्त होगा. 26 सितंबर को पूर्णिमा श्राद्ध किया जाएगा, जबकि 27 सितंबर से प्रतिपदा तिथि के साथ मुख्य श्राद्ध कर्म शुरू होंगे. पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और तर्पण के इस पर्व को लेकर लोगों ने अभी से तैयारियां शुरू कर दी हैं.

पूर्वजों के स्वागत की तैयारी
पितृपक्ष शुरू होने से पहले लोग श्राद्ध और तर्पण के लिए जरूरी सामग्री जुटाने में लगे हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृपक्ष के दौरान पूर्वजों को तर्पण और अन्न दान के माध्यम से श्रद्धा अर्पित की जाती है. पूर्वजों की शांति के लिए परिवार पहले से ही पूजन सामग्री की खरीदारी कर रहे हैं, ताकि श्राद्ध के दिनों में किसी तरह की परेशानी न हो.
भोग और भंडारे के लिए खरीदारी
पितृपक्ष के दौरान कई सामाजिक संस्थाओं की ओर से पितरों की शांति के लिए भोग और भंडारे का आयोजन भी किया जाता है. इन आयोजनों के लिए संस्थाओं से जुड़े लोग अलग-अलग बाजारों से बड़ी मात्रा में जरूरी सामान खरीद रहे हैं. वहीं, परिवारों में होने वाले श्राद्ध भोज के लिए भी लोग फुटकर दुकानों से सामग्री लेने पहुंच रहे हैं. पर्व की तैयारियों के चलते बाजारों में ग्राहकी बढ़ने लगी है.
बाजारों में सजी पूजा सामग्री की दुकानें
शास्त्री बाजार, गोलबाजार और इमरतराई समेत प्रमुख बाजारों में श्राद्ध और तर्पण से जुड़ी सामग्री की दुकानें सज गई हैं. दुकानदारों ने काला तिल, जौ, कुशा, सफेद चंदन, रोली, जनेऊ, कपूर और मिट्टी के दीये समेत जरूरी सामग्री का पर्याप्त स्टॉक किया है. व्यापारियों के मुताबिक, इस बार उपभोक्ताओं के बजट को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग कीमतों पर सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है.
पिछले साल की तुलना में दाम स्थिर
पितृपक्ष को लेकर बाजारों में खरीदारी बढ़ने की उम्मीद है. दुकानदारों का कहना है कि इस वर्ष पूजा और श्राद्ध से जुड़ी कई सामग्रियों के दाम पिछले साल की तुलना में स्थिर हैं. इससे लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है. पितृपक्ष की तारीख नजदीक आने के साथ बाजारों में खरीदारी और बढ़ने की संभावना है, वहीं परिवार और सामाजिक संस्थाएं श्राद्ध कर्म और भंडारे से जुड़ी तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटी हैं.


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