CG News: अंतरराष्ट्रीय सहकारिता दिवस पर रायपुर में मंथन, विकसित भारत-2047 में सहकारिता की भूमिका पर जोर
CG News: रायपुर में अंतरराष्ट्रीय सहकारिता दिवस के अवसर पर सहकारिता क्षेत्र के भविष्य, चुनौतियों और संभावनाओं पर व्यापक चर्चा हुई. विशेषज्ञों ने विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को हासिल करने में सहकारी संस्थाओं की अहम भूमिका पर जोर दिया. कार्यक्रम में कृषि, दुग्ध, वनोपज, मत्स्य और ग्रामीण बैंकिंग से जुड़े प्रतिनिधियों ने अपने सुझाव साझा किए.

विकसित भारत-2047 में सहकारिता की भूमिका पर चर्चा
राजधानी रायपुर के कृषि मंडपम, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, लाभांडी में आयोजित विशेष कार्यक्रम में सहकारिता क्षेत्र के विभिन्न आयामों पर विचार-विमर्श किया गया. कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और सहकारी संस्थाओं की भूमिका को नए सिरे से परिभाषित करना रहा. उद्घाटन समारोह में अपेक्स बैंक, मार्कफेड और जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे.
ग्रामीण विकास और रोजगार पर विशेषज्ञों का फोकस
पैनल चर्चा के दौरान विशेषज्ञों ने वनांचल क्षेत्रों में लघु वनोपज समितियों की उपयोगिता, दुग्ध सहकारिता के विस्तार, महिलाओं की आर्थिक भागीदारी, मत्स्य सहकारी समितियों के जरिए रोजगार बढ़ाने और किसानों को बेहतर वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की. वक्ताओं ने कहा कि सहकारिता मॉडल ग्रामीण विकास को नई दिशा देने में सक्षम है.
सहकारी सप्ताह के तहत हुआ आयोजन
भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय के गठन के पांच वर्ष पूरे होने के अवसर पर प्रदेश में 29 जून से 6 जुलाई तक सहकारी सप्ताह मनाया जा रहा है. इसी क्रम में अंतरराष्ट्रीय सहकारिता दिवस पर यह विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें सहकारी संस्थाओं, बैंकों, विभागीय अधिकारियों, पैक्स प्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में किसानों ने हिस्सा लिया.
समन्वित प्रयासों पर दिया गया जोर
कार्यक्रम में मौजूद वक्ताओं ने कहा कि विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को साकार करने के लिए सहकारी संस्थाओं, वित्तीय संगठनों और सरकारी एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है. उनका मानना है कि सहकारिता किसानों की आय बढ़ाने, महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और ग्रामीण क्षेत्रों में नए रोजगार के अवसर पैदा करने का प्रभावी माध्यम बन सकती है.
