CG News: 21 साल बाद बीजापुर के 11 गांवों में फिर गूंजी स्कूल की घंटी, 539 बच्चों को मिली शिक्षा की नई उम्मीद
CG News: छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के पीडिया क्षेत्र में दो दशक से अधिक समय बाद शिक्षा की नई शुरुआत हुई है। माओवादी हिंसा के चलते वर्षों से बंद पड़े 11 स्कूलों में एक बार फिर पढ़ाई शुरू हो गई है। इस पहल से 11 गांवों के 539 बच्चों को अपने ही गांव में शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिला है। स्थानीय लोगों के लिए यह केवल स्कूल खुलने की घटना नहीं, बल्कि सामान्य जीवन और विकास की वापसी का संकेत भी है।

प्रवेशोत्सव में बच्चों का गर्मजोशी से स्वागत
स्कूलों के दोबारा संचालन के साथ प्रवेशोत्सव का आयोजन किया गया। इस दौरान बच्चों का तिलक लगाकर स्वागत किया गया और उन्हें स्कूल बैग, कॉपी, पेन, स्लेट सहित अन्य शैक्षणिक सामग्री वितरित की गई। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, ग्रामीणों और अभिभावकों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिससे बच्चों का उत्साह और बढ़ गया।
इन 11 गांवों में फिर शुरू हुई पढ़ाई
पीडिया, पेदापाल, छोटेगोटोडी, कुएम, मदपाल, अंडरी, इडेनार, डोंडीतुमनार, मिरगानघोटूल, गमपुर और तमोड़ी गांवों के स्कूल लंबे समय से बंद थे। अब इनके दोबारा खुलने से बच्चों को शिक्षा के लिए दूर-दराज के इलाकों में नहीं जाना पड़ेगा और स्थानीय स्तर पर ही पढ़ाई की सुविधा उपलब्ध होगी।

37 बंद स्कूलों का हुआ पुनः संचालन
जिला प्रशासन के विशेष अभियान के तहत इस वर्ष अब तक जिले में 37 बंद स्कूलों को फिर से शुरू किया जा चुका है। इनमें 20 प्राथमिक और 17 उच्च प्राथमिक विद्यालय शामिल हैं। स्कूलों में भवन, पेयजल, बिजली और अन्य आवश्यक सुविधाओं को भी चरणबद्ध तरीके से बेहतर बनाया जा रहा है ताकि विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सके।
हर बच्चे तक शिक्षा पहुंचाने पर जोर
प्रशासन का लक्ष्य जिले के प्रत्येक बच्चे तक शिक्षा पहुंचाना है। जिन इलाकों में हालात सामान्य हुए हैं, वहां बंद पड़े स्कूलों को दोबारा शुरू किया जा रहा है ताकि कोई भी बच्चा पढ़ाई से वंचित न रहे। इसके साथ ही शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर भी लगातार काम किया जा रहा है।
बदलते बस्तर की नई तस्वीर
पीडिया क्षेत्र में 21 साल बाद स्कूलों का फिर से खुलना बदलते बस्तर की सकारात्मक तस्वीर पेश करता है। जिन गांवों में कभी स्कूलों की घंटी नहीं बजती थी, वहां अब बच्चों की चहल-पहल और पढ़ाई का माहौल लौट आया है। यह पहल शिक्षा के साथ-साथ क्षेत्र में विकास और विश्वास की नई शुरुआत का भी प्रतीक मानी जा रही है।

