CG News: छत्तीसगढ़ में 43 लाख स्मार्ट मीटर लगे, पीएम सूर्यघर योजना से 35 हजार से ज्यादा परिवारों के बिल ‘जीरो’
CG News: छत्तीसगढ़ में बिजली व्यवस्था को आधुनिक और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे स्मार्ट मीटर अभियान में बड़ी सफलता मिली है. पावर कंपनी के प्रबंध निदेशक (MD) भीम सिंह कंवर के अनुसार, राज्य में अब तक करीब 43 लाख परिसरों में स्मार्ट मीटर स्थापित किए जा चुके हैं. मई 2025 से जुलाई 2026 तक के आंकड़ों के विस्तृत विश्लेषण में यह पाया गया है कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिजली खपत में किसी भी प्रकार की अवांछित वृद्धि नहीं हुई है, जिससे भ्रांतियां दूर हुई हैं.

1.11 लाख से अधिक सोलर प्लांट स्थापित
प्रदेश में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ़्त बिजली योजना का तेजी से विस्तार हो रहा है. राज्य में अब तक 1,11,713 से अधिक सोलर प्लांट सफलता पूर्वक स्थापित किए जा चुके हैं. विभाग के अनुसार, वर्तमान में प्रतिदिन 500 से भी अधिक नए सोलर प्लांट लगाए जा रहे हैं. छतों पर रूफटॉप सोलर लगने से बड़ी संख्या में उपभोक्ता अब कम बिजली खपत वाले निचले स्लैब में आ गए हैं, जिससे उनके मासिक बिजली बिल में भारी गिरावट दर्ज की गई है.

उच्च खपत वाले उपभोक्ताओं की संख्या घटी
योजना के जमीनी प्रभावों की जानकारी देते हुए अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2026-27 के आंकड़ों के अनुसार 400 यूनिट से अधिक खपत करने वाले घरेलू उपभोक्ताओं की संख्या घटकर अब केवल 2.56 लाख रह गई है. सबसे खास बात यह है कि राज्य के 35 हजार से अधिक ऐसे सोलर उपभोक्ता हैं, जिनका मासिक बिजली बिल पूरी तरह शून्य (Zero) आ रहा है. इससे आम नागरिकों को महंगाई के दौर में बड़ी आर्थिक राहत मिल रही है.
1.08 लाख रुपए तक की सब्सिडी
पीएम सूर्यघर योजना को आम जनता के लिए किफायती बनाने हेतु केंद्र और राज्य सरकार मिलकर भारी वित्तीय सहायता (Subsidy) प्रदान कर रही हैं. योजना के अंतर्गत 3 किलोवाट क्षमता के सोलर प्लांट पर केंद्र सरकार की ओर से 78 हजार रुपये और छत्तीसगढ़ राज्य सरकार की ओर से 30 हजार रुपये तक की सब्सिडी दी जा रही है. इस तरह कुल मिलाकर उपभोक्ताओं को 1 लाख 8 हजार रुपये तक की बंपर सब्सिडी का सीधा लाभ प्राप्त हो रहा है.
अब तक 886 करोड़ रुपए की सब्सिडी सहायता
सौर ऊर्जा को घर-घर तक पहुंचाने के लिए वित्तीय मदद में कोई कमी नहीं की जा रही है. अब तक केंद्र सरकार की ओर से 661 करोड़ रुपये और राज्य सरकार की ओर से 225 करोड़ रुपये की डीबीटी (Direct Benefit Transfer) सहायता राशि जारी की जा चुकी है. बिजली विभाग का मानना है कि इस पहल से न केवल आम उपभोक्ताओं के बजट को राहत मिल रही है, बल्कि राज्य में हरित ऊर्जा (Green Energy) को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ पावर ग्रिड पर से लोड भी कम हो रहा है.
