CG News: छत्तीसगढ़ में किसानों के लिए खाद-बीज की व्यवस्था मजबूत, कालाबाजारी करने वालों पर सख्त कार्रवाई
CG News: खरीफ सीजन 2026 में देशभर में डीएपी की सीमित उपलब्धता के बीच छत्तीसगढ़ सरकार ने किसानों को समय पर खाद और बीज उपलब्ध कराने के लिए विशेष व्यवस्था की है. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर कृषि विभाग पूरे प्रदेश में उर्वरकों की उपलब्धता, वितरण और कीमतों की लगातार निगरानी कर रहा है. सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसी भी किसान को खाद की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा.
डीएपी का पर्याप्त भंडार उपलब्ध
कृषि विभाग के अनुसार खरीफ 2026 के लिए डीएपी का लक्ष्य 3 लाख मीट्रिक टन रखा गया है. 21 जुलाई तक प्रदेश में 1.84 लाख मीट्रिक टन से अधिक डीएपी का भंडारण किया गया, जिसमें से 1.26 लाख मीट्रिक टन किसानों को वितरित किया जा चुका है. इसके बावजूद समितियों और गोदामों में 58 हजार मीट्रिक टन से अधिक डीएपी उपलब्ध है, जो किसानों की आगामी जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त माना जा रहा है.
कालाबाजारी करने वालों पर सख्त कार्रवाई
उर्वरकों की कालाबाजारी, जमाखोरी और अधिक कीमत वसूलने वालों के खिलाफ कृषि विभाग लगातार अभियान चला रहा है. अब तक प्रदेश में 4,878 उर्वरक विक्रय केंद्रों का निरीक्षण किया गया है. कार्रवाई के दौरान 625 नोटिस जारी किए गए, 183 केंद्रों पर बिक्री पर रोक लगाई गई, 98 केंद्रों से उर्वरक जब्त किए गए, 97 लाइसेंस निलंबित किए गए और 11 लाइसेंस रद्द किए गए. इसके अलावा 56 मामले न्यायालय में भेजे गए हैं, जबकि 7 मामलों में एफआईआर भी दर्ज की गई है.
बारिश प्रभावित किसानों को मिलेगी मदद
भारी बारिश के कारण जिन क्षेत्रों में बुआई प्रभावित हुई है या दोबारा बुवाई की आवश्यकता पड़ रही है, वहां जिला प्रशासन और कृषि विभाग लगातार निगरानी कर रहे हैं. प्रभावित किसानों को तकनीकी सलाह, बीज, उर्वरक और शासन के नियमों के अनुसार आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया जारी है.
किसानों से सरकार की अपील
राज्य सरकार ने किसानों से अपील की है कि वे केवल अधिकृत विक्रेताओं और सहकारी समितियों से ही निर्धारित मूल्य पर उर्वरक खरीदें. यदि कहीं अधिक कीमत वसूली, कालाबाजारी या किसी अन्य प्रकार की अनियमितता दिखाई दे, तो इसकी सूचना तुरंत कृषि विभाग या जिला प्रशासन को दें, ताकि दोषियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जा सके, कृषि वैज्ञानिकों की सलाह के अनुसार किसानों को डीएपी के साथ एनपीके और अन्य संतुलित उर्वरकों के उपयोग के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है. सरकार का उद्देश्य फसलों को संतुलित पोषण देना और डीएपी पर अत्यधिक निर्भरता को कम करना है.
