CG News: छत्तीसगढ़ में डीएपी संकट के बीच किसानों को नहीं हुई खाद की कमी, खरीफ 2026 के लिए सरकार ने किया पर्याप्त उर्वरक भंडारण
CG News: वैश्विक स्तर पर डीएपी की कमी और आपूर्ति संबंधी चुनौतियों के बावजूद छत्तीसगढ़ में खरीफ सीजन 2026 के दौरान किसानों को खाद की कमी का सामना नहीं करना पड़ा. राज्य सरकार ने केंद्र के साथ समन्वय कर समय पर डीएपी और अन्य रासायनिक उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की, जिससे खेती का काम प्रभावित नहीं हुआ.

13.16 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का लक्ष्य पूरा
राज्य सरकार ने खरीफ सीजन के लिए 13.16 लाख मीट्रिक टन रासायनिक उर्वरकों के भंडारण का लक्ष्य पूरा किया. 30 जून 2026 तक प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को 7.28 लाख मीट्रिक टन उर्वरक वितरित किए जा चुके हैं. वहीं, भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए 5.88 लाख मीट्रिक टन से अधिक उर्वरकों का बफर स्टॉक भी सुरक्षित रखा गया है.

जुलाई में मिली अतिरिक्त डीएपी की खेप
डीएपी की वैश्विक कमी के बीच जुलाई 2026 में छत्तीसगढ़ को 46,500 मीट्रिक टन अतिरिक्त डीएपी की आपूर्ति मिली. इससे धान की बोआई और रोपाई के महत्वपूर्ण समय में किसानों को खाद के लिए इंतजार नहीं करना पड़ा और खेती का कार्य समय पर जारी रहा.
दूरस्थ जिलों तक समय पर पहुंची खाद
सरगुजा, बस्तर, बीजापुर, कोरबा सहित दूरस्थ जिलों में भी डीएपी और यूरिया की समय पर आपूर्ति सुनिश्चित की गई. बेहतर वितरण व्यवस्था के कारण किसानों को लंबी कतारों में खड़ा नहीं होना पड़ा और फसलों को शुरुआती चरण में आवश्यक पोषण मिल सका.
कालाबाजारी रोकने के लिए सख्त निगरानी
खाद की जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए जिला प्रशासन और मार्कफेड की संयुक्त टीमों को नियमित निरीक्षण के निर्देश दिए गए हैं. सीमावर्ती क्षेत्रों में विशेष चेकपोस्ट सक्रिय किए गए हैं, जबकि राज्य और जिला स्तर के कंट्रोल रूम उर्वरकों की उपलब्धता, मांग और वितरण की लगातार निगरानी कर रहे हैं, कृषि विभाग किसानों को नैनो डीएपी और नैनो यूरिया अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है. गांव-गांव में प्रशिक्षण शिविर आयोजित कर आधुनिक उर्वरक तकनीकों की जानकारी दी जा रही है. साथ ही एसएसपी और जिंक आधारित उर्वरकों के संतुलित उपयोग पर भी जोर दिया जा रहा है.
किसानों को मिला बेहतर उत्पादन
महासमुंद जिले के किसानों ने नैनो उर्वरकों के उपयोग से सकारात्मक परिणाम मिलने की जानकारी दी है. किसानों का कहना है कि नैनो डीएपी और नैनो यूरिया के उपयोग से रासायनिक उर्वरकों की खपत कम हुई है, लागत घटी है और उत्पादन पर भी अच्छा प्रभाव देखने को मिला है. सरकार का मानना है कि समय पर खाद की उपलब्धता और आधुनिक खेती को बढ़ावा देने से किसानों की आय और कृषि उत्पादन दोनों में वृद्धि होगी.

