CG News: बस्तर मॉडल: जब प्रशासन खुद पहुंचा जनता के द्वार, 8 हजार से ज्यादा भूमि मामलों का समाधान
CG News: छत्तीसगढ़ के जनजातीय बहुल बस्तर जिले ने राजस्व प्रशासन में एक ऐसी पहल की है, जिसने पारंपरिक सरकारी कार्यप्रणाली को बदलकर रख दिया है। फौती नामांतरण जैसे वर्षों से लंबित रहने वाले मामलों के समाधान के लिए प्रशासन ने दफ्तरों में इंतजार करने के बजाय खुद गांव-गांव पहुंचकर लोगों की समस्याएं सुलझाईं। डिजिटल तकनीक और जमीनी स्तर के कर्मचारियों के समन्वय से बस्तर ने सुशासन का एक नया मॉडल विकसित किया है।
फौती नामांतरण की समस्या का नया समाधान
ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन मालिक की मृत्यु के बाद वारिसों के नाम भूमि हस्तांतरण यानी फौती नामांतरण एक जटिल प्रक्रिया मानी जाती रही है। जानकारी की कमी, लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया और बिचौलियों के कारण कई मामले वर्षों तक लंबित रहते थे। इससे पारिवारिक विवाद बढ़ने के साथ किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में भी परेशानी होती थी।
जब प्रशासन खुद पहुंचा गांवों तक
बस्तर प्रशासन ने पारंपरिक “आवेदन आने पर कार्रवाई” की व्यवस्था को बदलते हुए सक्रिय पहल की। अधिकारियों ने तय किया कि लोगों को कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे, बल्कि प्रशासन स्वयं गांवों तक पहुंचकर लंबित मामलों का समाधान करेगा। इसी सोच के तहत चार महीनों में 611 गांवों का सर्वे कर लंबित मामलों को चिन्हित किया गया।
ग्रासरूट ब्यूरोक्रेसी की ‘त्रिमूर्ति’ बनी सफलता की कुंजी
इस अभियान की सफलता के पीछे सचिव, पटवारी और कोटवार की मजबूत टीम रही। ग्राम सचिवों ने मृत व्यक्तियों की सूची तैयार की, पटवारियों ने डिजिटल भूमि रिकॉर्ड से उसका मिलान कर वारिसों की जानकारी जुटाई, जबकि कोटवारों ने गांव स्तर पर सामाजिक सत्यापन कर पारदर्शिता सुनिश्चित की। इस समन्वय ने फर्जी दावों और विवादों की संभावना लगभग समाप्त कर दी।
भुइयां पोर्टल ने बढ़ाई प्रक्रिया की रफ्तार
डिजिटल भूमि रिकॉर्ड पोर्टल ‘भुइयां’ के माध्यम से 8,651 ऐसे मामलों की पहचान की गई, जिनमें मृत व्यक्तियों के नाम पर भूमि दर्ज थी। इसके बाद ऑनलाइन प्रक्रिया के जरिए नामांतरण की कार्रवाई को तेज किया गया और हजारों रिकॉर्ड अपडेट किए गए, जिले में चिन्हित 8,651 आवश्यक मामलों में से 8,241 मामलों का निराकरण कर भूमि अभिलेखों को अद्यतन किया जा चुका है। अब केवल 410 प्रकरण ही लंबित हैं। यह उपलब्धि प्रशासनिक दक्षता और प्रभावी मॉनिटरिंग का उदाहरण मानी जा रही है।
तोकापाल और बकावण्ड बने अभियान के अग्रणी केंद्र
तोकापाल तहसील में सर्वाधिक 1,454 मामलों का समाधान किया गया, जबकि बकावण्ड तहसील अपने लक्ष्य के लगभग शत-प्रतिशत करीब पहुंच चुकी है। जगदलपुर, बस्तर, भानपुरी और लोहण्डीगुड़ा जैसी तहसीलों ने भी उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है, भूमि रिकॉर्ड अपडेट होने के बाद हजारों किसान अब किसान क्रेडिट कार्ड (KCC), कृषि सब्सिडी और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ आसानी से प्राप्त कर सकेंगे। साथ ही बिचौलियों की भूमिका समाप्त होने से आर्थिक और मानसिक परेशानियों में भी कमी आई है।
अब 10 वर्षों के लंबित मामलों पर फोकस
चार वर्षों के लंबित मामलों के सफल समाधान के बाद बस्तर प्रशासन अब अगले चरण में पिछले 10 वर्षों से लंबित फौती नामांतरण प्रकरणों का शत-प्रतिशत निराकरण करने की दिशा में काम कर रहा है, बस्तर का यह प्रयोग केवल राजस्व रिकॉर्ड सुधारने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रशासन और जनता के बीच भरोसे को मजबूत करने की मिसाल भी है। यह मॉडल साबित करता है कि तकनीक, संवेदनशील प्रशासन और जमीनी स्तर के कर्मचारियों के समन्वय से सबसे कठिन समस्याओं का भी प्रभावी समाधान संभव है।

