Karwa Chauth 2026: MP-CG में धूमधाम से मना करवा चौथ, रीवा में दिखी सामाजिक सद्भाव की मिसाल
Karwa Chauth 2026: मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में करवा चौथ का त्योहार पारंपरिक रीति-रिवाजों और उत्साह के साथ मनाया गया. भोपाल, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर और ग्वालियर सहित मध्य प्रदेश के कई शहरों में महिलाओं ने पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ व्रत रखा. वहीं छत्तीसगढ़ के रायपुर, बिलासपुर, राजनांदगांव, दुर्ग और भिलाई में भी पर्व की रौनक दिखाई दी. पारंपरिक परिधानों और सोलह श्रृंगार से सजी महिलाओं ने पूजा-अर्चना कर चंद्रमा के दर्शन के बाद व्रत पूरा किया.

भोपाल, इंदौर समेत MP के शहरों में रही त्योहार की रौनक
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के साथ इंदौर, उज्जैन, जबलपुर और ग्वालियर में करवा चौथ को लेकर महिलाओं में खास उत्साह रहा. दिनभर उपवास रखने के बाद महिलाओं ने शाम को विधि-विधान से पूजा की और करवा चौथ की कथा सुनी. त्योहार के चलते बाजारों में भी अच्छी चहल-पहल देखने को मिली. महिलाओं ने पूजा सामग्री, साड़ी, चूड़ियां, मेहंदी और अन्य श्रृंगार के सामान की खरीदारी की.

रीवा में विभिन्न धर्मों की महिलाओं ने साथ मनाया करवा चौथ
विंध्य की नगरी रीवा में करवा चौथ का आयोजन सामाजिक एकता और सद्भाव के संदेश के कारण खास रहा. यहां अलग-अलग धर्मों की महिलाओं ने एक साथ जुटकर त्योहार मनाया. आयोजन में पंजाबी संस्कृति की झलक देखने को मिली. ढोल-नगाड़ों की थाप और पारंपरिक परिधानों में सजी महिलाओं के उत्साह ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया. सामूहिक आयोजन के जरिए प्रेम, भाईचारे और आपसी सौहार्द का संदेश दिया गया.

छत्तीसगढ़ के शहरों में भी दिखा करवा चौथ का उत्साह
छत्तीसगढ़ के रायपुर, बिलासपुर, राजनांदगांव, दुर्ग और भिलाई में भी महिलाओं ने अपने पति की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य की कामना के साथ व्रत रखा. शाम को पूजा-अर्चना और कथा के बाद महिलाओं ने चंद्रमा के निकलने का इंतजार किया. इस दौरान बाजारों में भी खरीदारी और त्योहार की तैयारियों को लेकर रौनक बनी रही, करवा चौथ की परंपरा के अनुसार महिलाएं दिनभर उपवास रखती हैं और शाम को पूजा के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देती हैं. इसके बाद पति का चेहरा देखकर व्रत खोलने की परंपरा निभाई जाती है. कई जगहों पर महिलाओं ने सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना की. प्रेम, विश्वास और समर्पण से जुड़ा यह पर्व मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में पारिवारिक खुशियों और सांस्कृतिक परंपराओं के उत्सव के रूप में मनाया गया.

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