CG Special Story: बस्तर में बदल रही माओवादी हिंसा की तस्वीर, 7,567 आत्मसमर्पित माओवादियों में से 2,323 को मिला कौशल प्रशिक्षण
CG Special Story: कभी माओवादी हिंसा से प्रभावित रहे बस्तर संभाग में अब पुनर्वास, कौशल प्रशिक्षण और रोजगार के जरिए युवाओं को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं. अब तक आत्मसमर्पण करने वाले 7,567 माओवादियों में से 2,323 को रोजगारोन्मुखी व्यवसायों का प्रशिक्षण दिया जा चुका है. वहीं, नियद नेल्ला नार योजना 2.0 के तहत 10 जिलों में 1 लाख 11 हजार 165 युवाओं को प्रशिक्षण मिला है और इनमें से 50 हजार 53 लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है.

आत्मसमर्पित युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर
सरकार का लक्ष्य आत्मसमर्पित माओवादियों और हिंसा से प्रभावित परिवारों को सम्मानजनक आजीविका उपलब्ध कराकर आत्मनिर्भर बनाना है. इसके लिए बीजापुर, दंतेवाड़ा, सुकमा, बस्तर, नारायणपुर, कांकेर, कोंडागांव और गरियाबंद में युवाओं को अलग-अलग व्यवसायों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है. इनमें असिस्टेंट इलेक्ट्रिशियन, राजमिस्त्री, सोलर पीवी इंस्टालर, वाहन मरम्मत तकनीशियन और सिलाई मशीन ऑपरेटर जैसे रोजगार से जुड़े पाठ्यक्रम शामिल हैं.
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नियद नेल्ला नार योजना से मिल रहे रोजगार के अवसर
नियद नेल्ला नार योजना के तहत आत्मसमर्पित माओवादियों में से 1,267 युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जबकि 461 युवा अभी प्रशिक्षण ले रहे हैं. वहीं, माओवादी हिंसा से प्रभावित परिवारों के 779 हितग्राही प्रशिक्षण पूरा कर चुके हैं और 191 प्रशिक्षणरत हैं. इस पहल के जरिए युवाओं को रोजगार के लिए जरूरी कौशल उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है, बीजापुर में प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं को गारमेंट फैक्ट्री, राजमिस्त्री और सिलाई जैसे कामों से जोड़ा गया है. वहीं, बस्तर में युवाओं को पुलिस बल, सुरक्षा गार्ड, कृषि और श्रम से जुड़े कार्यों में अवसर मिले हैं. इन प्रयासों का उद्देश्य प्रशिक्षण के बाद युवाओं को स्थायी आजीविका के विकल्प उपलब्ध कराना है.
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छह पुनर्वास केंद्रों में मिल रहा व्यावसायिक प्रशिक्षण
बस्तर संभाग में संचालित आठ पुनर्वास केंद्रों में से छह केंद्रों को व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदाता के रूप में पंजीकृत किया गया है. इनमें बीजापुर, दंतेवाड़ा, नारायणपुर, सुकमा, बस्तर और कांकेर शामिल हैं. प्रशिक्षण के लिए जरूरी दस्तावेजों की कमी के कारण पात्र युवा वंचित न रहें, इसके लिए पंजीयन के दौरान आधार कार्ड की अनिवार्यता में छूट दी गई है. इसके अलावा दुर्गम क्षेत्रों तक प्रशिक्षण पहुंचाने के लिए प्रत्येक विकासखंड में स्किल डेवलपमेंट सेंटर स्थापित करने की दिशा में काम किया जा रहा है.

बीजापुर में 30 युवाओं का प्रशिक्षण शुरू
बीजापुर में असिस्टेंट मेसन पाठ्यक्रम के तहत 30 युवाओं का प्रशिक्षण शुरू किया गया है. प्रभावित क्षेत्रों में आवासीय प्रशिक्षण सुविधाओं का विस्तार करने के लिए 780 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है. सरकार का कहना है कि कौशल विकास और रोजगार से जुड़े ये प्रयास युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ क्षेत्र में विश्वास और स्थायी शांति का माहौल तैयार करने में मददगार होंगे, पुनर्वास और रोजगार के साथ सुरक्षा मोर्चे पर भी माओवादी नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई जारी है. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, राज्य गठन के बाद से सुरक्षा बलों ने माओवादियों के पास से 3,500 से अधिक हथियार बरामद किए हैं. बस्तर पुलिस के मुताबिक, बीते एक साल में ही 600 से अधिक हथियार जब्त किए गए. इनमें AK-47, इंसास, SLR और LMG जैसे आधुनिक हथियार शामिल हैं.

माओवादी सैन्य क्षमता खत्म करना भी अभियान का हिस्सा
बस्तर आईजी बद्रीनारायण मीणा के अनुसार, सुरक्षा बलों की रणनीति केवल मुठभेड़ों तक सीमित नहीं रही है. अभियान का एक प्रमुख उद्देश्य माओवादियों की सैन्य क्षमता और हथियारों के नेटवर्क को कमजोर करना भी रहा है. उन्होंने बताया कि कार्रवाई के दौरान BGL लॉन्चर जैसे भारी हथियार भी बरामद किए गए हैं, जिनका इस्तेमाल माओवादी बड़े हमलों में करते थे, बस्तर पुलिस की ओर से उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2020 में 89 हथियार बरामद किए गए थे. वर्ष 2021 में 80, 2022 में 61 और 2023 में 35 हथियार जब्त हुए. इसके बाद वर्ष 2024 में यह संख्या बढ़कर 286 और वर्ष 2025 में 677 हो गई. वहीं, वर्ष 2026 में अगस्त तक 31 हथियार बरामद किए जाने की जानकारी दी गई है.

पुनर्वास और सुरक्षा अभियान से शांति की कोशिश
बस्तर में माओवादी हिंसा से निपटने के लिए सुरक्षा कार्रवाई के साथ पुनर्वास, कौशल प्रशिक्षण और रोजगार को भी महत्वपूर्ण रणनीति के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है. एक ओर आत्मसमर्पित युवाओं को आजीविका से जोड़ने की पहल हो रही है, तो दूसरी ओर सुरक्षा बल हथियारों और माओवादी नेटवर्क के खिलाफ अभियान चला रहे हैं. इन प्रयासों के जरिए क्षेत्र में विकास और स्थायी शांति का वातावरण बनाने की कोशिश की जा रही है.


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