CG Success Story: जशपुर की माधुरी निकुंज ने मसाला उद्योग से बनाई पहचान, बिहान और पीएमएफएमई योजना से मिली 4.40 लाख की मदद
CG Success Story: छत्तीसगढ़ में ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए राज्य सरकार की ओर से कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ और केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से महिलाएं स्व-सहायता समूहों से जुड़कर स्वरोजगार अपना रही हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी जशपुर जिले के फरसाबहार विकासखंड के ग्राम खुटगांव की रहने वाली माधुरी निकुंज की है, जिन्होंने सरकारी योजनाओं से मिले आर्थिक सहयोग का इस्तेमाल कर अपना मसाला उद्योग शुरू किया और आज सालाना करीब डेढ़ लाख रुपये की आय अर्जित कर रही हैं।

वर्ष 2017 में बिहान योजना से जुड़ीं माधुरी
माधुरी निकुंज वर्ष 2017 में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़ी थीं। स्व-सहायता समूह का हिस्सा बनने के बाद उन्हें बचत, बैंक लिंकेज और स्वरोजगार के लिए वित्तीय सुविधाओं की जानकारी और लाभ मिला। अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करने के उद्देश्य से उन्होंने मसाला निर्माण का व्यवसाय शुरू करने का फैसला किया, मसाला उद्योग स्थापित करने के लिए माधुरी को बिहान योजना के बैंक लिंकेज के तहत 3 लाख रुपये की वित्तीय सहायता मिली। इसके अलावा प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना यानी पीएमएफएमई के तहत 1 लाख 40 हजार रुपये का सहयोग प्राप्त हुआ। इस तरह दोनों योजनाओं से कुल 4 लाख 40 हजार रुपये की सहायता मिलने के बाद उन्होंने अपना मसाला उद्योग शुरू किया।
मसाला कारोबार से सालाना डेढ़ लाख रुपये की कमाई
सरकारी योजनाओं से मिले सहयोग और अपनी मेहनत के दम पर माधुरी ने मसाला निर्माण को सफल आजीविका का माध्यम बनाया है। वर्तमान में इस व्यवसाय से उन्हें हर साल लगभग 1 लाख 50 हजार रुपये की आय हो रही है। इस कमाई से वे परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में सहयोग कर रही हैं और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं। उनकी इस उपलब्धि ने उन्हें लखपति दीदी के रूप में नई पहचान दिलाई है।

बिहान और पीएमएफएमई योजना से बढ़ रहे स्वरोजगार के अवसर
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जोड़कर बचत, बैंक ऋण और आजीविका संवर्धन के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। वहीं पीएमएफएमई योजना के जरिए खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े छोटे उद्यमों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इन योजनाओं के सहयोग से महिलाएं मसाला निर्माण, खाद्य प्रसंस्करण और अन्य लघु उद्योगों में आगे बढ़ रही हैं, माधुरी निकुंज की सफलता यह बताती है कि सरकारी योजनाओं का सही उपयोग, मेहनत और उद्यमशीलता ग्रामीण महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकती है। वर्ष 2017 में स्व-सहायता समूह से जुड़ने से लेकर अपना मसाला उद्योग स्थापित करने और सालाना डेढ़ लाख रुपये की आय अर्जित करने तक का उनका सफर दूसरी महिलाओं के लिए प्रेरणा है।
महिला सशक्तीकरण को मिल रही नई दिशा
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तीकरण और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के प्रयास किए जा रहे हैं। जशपुर की माधुरी निकुंज जैसी महिलाएं इन योजनाओं का लाभ लेकर अपने हुनर को व्यवसाय में बदल रही हैं। उनकी सफलता से यह संदेश मिलता है कि उचित अवसर और आर्थिक सहयोग मिलने पर ग्रामीण महिलाएं न केवल अपने परिवार की खुशहाली में योगदान दे सकती हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दे सकती हैं।

