CG News: छत्तीसगढ़ के मातंगी माता मंदिर की अनोखी मान्यता, घड़ी बांधने से पूरी होती है मनोकामना
CG News: छत्तीसगढ़ में एक ऐसा प्रसिद्ध मंदिर है, जहां श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूरी होने की उम्मीद में घड़ी बांधते हैं. रायपुर से करीब 45 किलोमीटर दूर कुरुद विकासखंड के जीजामगांव, बिरेझर गांव स्थित मां मातंगी देवी धाम अपनी अनोखी धार्मिक परंपराओं के कारण दूर-दूर तक प्रसिद्ध है. यहां हर साल हजारों श्रद्धालु घड़ी, घंटी, ताला और नारियल चढ़ाकर माता का आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं.

घड़ी बांधने की अनोखी परंपरा
मां मातंगी देवी धाम की सबसे खास मान्यता घड़ी बांधने की है. श्रद्धालु अपनी मनोकामना मांगकर मंदिर परिसर में घड़ी बांधते हैं. स्थानीय मान्यता के अनुसार, जब वह घड़ी बंद हो जाती है, तब व्यक्ति के जीवन में अच्छे समय की शुरुआत होती है. इसी विश्वास के चलते मंदिर परिसर में हजारों घड़ियां बंधी हुई दिखाई देती हैं.

घंटी, ताला और नारियल चढ़ाने की भी है मान्यता
मंदिर में घड़ी के अलावा घंटी और ताला बांधने की भी परंपरा है. श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इससे जीवन की बाधाएं और परेशानियां दूर होती हैं. वहीं लाल कपड़े में नारियल बांधकर मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना की जाती है. पीले कपड़े में नारियल बांधने की परंपरा नकारात्मक प्रभावों और बुरी शक्तियों से रक्षा की कामना से जुड़ी मानी जाती है.

कई राज्यों से पहुंचते हैं श्रद्धालु
मां मातंगी देवी धाम में केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि ओडिशा, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं. लोग अपनी आस्था और विश्वास के साथ यहां पूजा-अर्चना करते हैं और अपनी मनोकामनाएं माता के चरणों में अर्पित करते हैं.
श्रद्धालुओं ने साझा किए अपने अनुभव
कोरबा से आई श्रद्धालु कमला साहू ने बताया कि उन्होंने भी घड़ी, घंटी और ताला बांधकर माता से अपनी मनोकामना मांगी है. उनका विश्वास है कि इससे जीवन की बाधाएं दूर होती हैं. वहीं दुर्ग से पहुंची ज्योति साहू ने कहा कि उन्होंने इस मंदिर की अनोखी परंपरा के बारे में कई लोगों से सुना था, जिसके बाद यहां दर्शन करने की इच्छा पूरी हुई.
पुजारी ने बताई मंदिर की विशेष मान्यता
मंदिर के पुजारी हरिओम महाराज के अनुसार, मां मातंगी देवी धाम में घड़ी, घंटी, ताला और नारियल चढ़ाने की परंपरा वर्षों से चली आ रही है. श्रद्धालुओं का विश्वास है कि सच्ची श्रद्धा और आस्था के साथ की गई प्रार्थना से माता उनकी मनोकामनाएं पूरी करती हैं. यही अनोखी परंपरा इस मंदिर को छत्तीसगढ़ के प्रमुख आस्था केंद्रों में विशेष पहचान दिलाती है.

