CG News: छत्तीसगढ़ की ARKASA ने पोलैंड में पूरी की Human Centrifuge Training, स्पेस रिसर्च में रचा नया इतिहास
CG News: छत्तीसगढ़ की स्पेस रिसर्च संस्था ARKASA ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए पोलैंड में विश्वस्तरीय Human Centrifuge Training सफलतापूर्वक पूरी की है. यह अत्याधुनिक मिलिट्री-ग्रेड प्रशिक्षण अंतरिक्ष यात्रियों और F-16, F-35, तथा MiG-29 जैसे लड़ाकू विमान के पायलटों को हाई G-Force परिस्थितियों के लिए तैयार करने में इस्तेमाल किया जाता है. इस सफलता ने छत्तीसगढ़ को वैश्विक स्पेस रिसर्च के क्षेत्र में नई पहचान दिलाई है.

भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों पर ARKASA का फोकस
रायपुर स्थित ARKASA, स्पेस आर्किटेक्चर एंड डिज़ाइन रिसर्च लैब, विज्ञान, वास्तुकला, डिज़ाइन और मानव अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में काम कर रही है. संस्था का उद्देश्य भविष्य के चंद्र और मंगल मिशनों, मानव-केंद्रित स्पेस हैबिटेट, एनालॉग एस्ट्रोनॉट मिशन और स्पेस एजुकेशन में अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देना है, ARKASA, ISRO के Space Tutor Program के तहत आधिकारिक रूप से पंजीकृत है और IN-SPACe के स्टार्टअप इकोसिस्टम का भी हिस्सा है. संस्था भारत में स्पेस आर्किटेक्चर को एक नए अकादमिक और रिसर्च क्षेत्र के रूप में स्थापित करने के साथ-साथ युवाओं और शोधकर्ताओं को अंतरिक्ष विज्ञान में करियर बनाने के लिए प्रेरित कर रही है.

पोलैंड में मिला विश्वस्तरीय प्रशिक्षण
यह Human Centrifuge Training पोलैंड के Analog Astronaut Training Centre और Military Institute of Aviation Medicine, वारसॉ, के सहयोग से आयोजित की गई. इस प्रशिक्षण में ARKASA की संस्थापक आर्किटेक्ट अर्शलीन कौर साहनी, सह-संस्थापक आर्किटेक्ट बिस्वजीत दास, टीम सदस्य लुमेश साहू और अनुष्का राठौर ने संस्था का प्रतिनिधित्व किया.
हाई G-Force परिस्थितियों का मिला व्यावहारिक अनुभव
इस प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को नियंत्रित वातावरण में अत्यधिक G-Force का अनुभव कराया गया. टीम ने Anti-G तकनीकों, G-LOC से बचाव, हाई एक्सेलेरेशन के दौरान मानव शरीर की प्रतिक्रियाओं और लड़ाकू विमान के कॉकपिट जैसी वास्तविक परिस्थितियों में प्रशिक्षण प्राप्त किया. यह अनुभव भविष्य के मानव अंतरिक्ष मिशनों की तैयारी के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है.
स्पेस आर्किटेक्चर रिसर्च को मिलेगी नई मजबूती
ARKASA की संस्थापक अर्शलीन कौर साहनी ने कहा कि मानव अंतरिक्ष अन्वेषण का भविष्य केवल तकनीक तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समझना भी जरूरी है कि कठिन अंतरिक्ष परिस्थितियों में मानव शरीर कैसे कार्य करता है. इस प्रशिक्षण से मिले अनुभव भविष्य में स्पेस आर्किटेक्चर, मानव-केंद्रित अंतरिक्ष आवास और मानव अंतरिक्ष उड़ान अनुसंधान को नई दिशा देंगे.
छत्तीसगढ़ से वैश्विक स्पेस इनोवेशन तक ऐतिहासिक कदम
पोलैंड में विश्वस्तरीय मिलिट्री-ग्रेड एयरोस्पेस प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा कर ARKASA ने यह साबित किया है कि छत्तीसगढ़ के शोधकर्ता और नवप्रवर्तक भी वैश्विक स्पेस रिसर्च में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं. यह उपलब्धि न केवल संस्था, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ और भारत के उभरते स्पेस इनोवेशन इकोसिस्टम के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर मानी जा रही है.

