CG News: छत्तीसगढ़ में लागू होगा समान नागरिक संहिता, UCC ड्राफ्ट तैयार करने के लिए बनी हाईलेवल कमेटी
CG News: छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता, यानी UCC, लागू करने की तैयारी तेज हो गई है. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा है कि प्रदेश में भी समान नागरिक संहिता लागू की जाएगी. इसके लिए सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश डॉ. रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है.
UCC समिति की पहली बैठक पूरी
शुक्रवार को UCC ड्राफ्ट तैयार करने वाली समिति की पहली औपचारिक बैठक आयोजित हुई. बैठक में समान नागरिक संहिता का मसौदा तैयार करने की रणनीति और आगे की कार्ययोजना पर चर्चा की गई, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने उम्मीद जताई है कि आगामी शीतकालीन सत्र में UCC विधेयक को विधानसभा में पेश कर पारित कराया जा सकता है.
जनता से भी लिए जाएंगे सुझाव
UCC का मसौदा तैयार करने वाली समिति केवल सरकारी स्तर पर काम नहीं करेगी, बल्कि आम नागरिकों, सामाजिक संगठनों और विशेषज्ञों से भी सुझाव लेगी, इसके लिए जल्द ही एक वेब पोर्टल शुरू करने की तैयारी है. इस पोर्टल के माध्यम से लोग सीधे अपने सुझाव और आपत्तियां समिति तक पहुंचा सकेंगे.
15 अप्रैल को कैबिनेट में लिया गया था फैसला
राज्य सरकार ने 15 अप्रैल को हुई कैबिनेट बैठक में UCC का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए समिति बनाने का निर्णय लिया था. इसके बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने 25 जून को आधिकारिक आदेश जारी किया, समिति में डॉ. रंजना प्रकाश देसाई के अलावा शत्रुघ्न सिंह, मोहन पवार, एमके राउत और ज्योति रानी सिंह को सदस्य बनाया गया है.
क्या है समान नागरिक संहिता
समान नागरिक संहिता का मतलब है कि विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे व्यक्तिगत मामलों में सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून लागू हो, वर्तमान में अलग-अलग धर्मों के लिए अलग-अलग पर्सनल लॉ मौजूद हैं. UCC का उद्देश्य इन्हीं मामलों में एक समान और सरल कानूनी व्यवस्था तैयार करना है, UCC के समर्थकों का कहना है कि इससे महिलाओं को समान अधिकार और न्याय मिलेगा. संपत्ति, विवाह और तलाक जैसे मामलों में लैंगिक समानता को बढ़ावा देने की बात कही जा रही है.
UCC में शामिल हो सकते हैं ये बड़े प्रावधान
विवाह और तलाक के नियम
सभी धर्मों के लिए शादी की उम्र और नियमों में समानता लाई जा सकती है. बहुविवाह जैसी प्रथाओं पर रोक लगाने और तलाक की प्रक्रिया को समान बनाने का प्रावधान शामिल हो सकता है.
संपत्ति और उत्तराधिकार
पैतृक और अर्जित संपत्ति में बेटों और बेटियों को बराबर अधिकार देने की व्यवस्था प्रस्तावित की जा सकती है.
विवाह और लिव-इन का पंजीकरण
विवाह के साथ लिव-इन रिलेशनशिप के पंजीकरण को भी अनिवार्य करने का प्रावधान शामिल होने की संभावना है.
गोद लेने के नियम
बच्चों को गोद लेने की प्रक्रिया को धर्म से अलग, पारदर्शी और आसान बनाने पर जोर दिया जा सकता है.
मध्य प्रदेश के बाद छत्तीसगढ़ में तैयारी तेज
गौरतलब है कि पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश में 21 जुलाई 2026 को विधानसभा से UCC पारित किया जा चुका है. अब छत्तीसगढ़ सरकार भी इसी दिशा में आगे बढ़ रही है, अब सभी की नजर इस बात पर है कि समिति कब तक अपना मसौदा तैयार करती है और शीतकालीन सत्र में सरकार इसे विधानसभा में किस रूप में पेश करती है.
