CG News: रायपुर दूरदर्शन टावर की अनोखी कहानी, 165 मीटर ऊंचा टावर बना इंजीनियरिंग का शानदार नमूना
CG News: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर का शंकर नगर स्थित दूरदर्शन टीवी टावर अपनी ऊंचाई और इंजीनियरिंग के लिए खास पहचान रखता है. बहुत कम लोग जानते हैं कि यह टावर देश की ऐतिहासिक कुतुब मीनार से भी दोगुने से अधिक ऊंचा है. जहां कुतुब मीनार की ऊंचाई 72 मीटर है, वहीं रायपुर का यह टीवी टावर 165 मीटर ऊंचा है. बीते 90 के दशक में इसका निर्माण कोलकाता की एक कंपनी ने किया था और आज भी इसे इंजीनियरिंग का शानदार नमूना माना जाता है.

165 मीटर ऊंचा है रायपुर का टीवी टावर
रायपुर के शंकर नगर स्थित इस टावर की कंक्रीट संरचना 105 मीटर ऊंची है. इसके ऊपर 45 मीटर ऊंचा स्टील फैब्रिकेशन टावर लगाया गया है. सबसे ऊपर 15 मीटर ऊंचा एंटीना स्थापित है. इस तरह टावर की कुल ऊंचाई 165 मीटर तक पहुंचती है, पिछले तीन दशकों से यह टावर रायपुर की प्रमुख पहचान बना हुआ है, इस टावर की सबसे खास बात यह है कि इसमें लिफ्ट नहीं लगी है. ऊपर तक पहुंचने के लिए करीब 468 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं, इंजीनियरों के अनुसार, पूरी संरचना कंक्रीट से बनी है. इसी डिजाइन के टावर जगदलपुर, जबलपुर और नागपुर में भी बनाए गए थे.

तेज हवा का रहता है दबाव
अधिकारियों के मुताबिक, टावर के ऊपरी हिस्से में लगे स्टील फैब्रिकेशन पर तेज हवा का काफी दबाव पड़ता है. तीन दशक से अधिक समय बीत जाने के कारण कई बार फैब्रिकेशन में लगे नट-बोल्ट ढीले हो जाते हैं, जिनका समय-समय पर रखरखाव किया जाता है, टावर को वज्रपात से सुरक्षित रखने के लिए दो विशेष अर्थिंग सिस्टम लगाए गए हैं. ये सिस्टम 150 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई पर गिरने वाली आकाशीय बिजली को सुरक्षित तरीके से जमीन तक पहुंचा देते हैं, जिससे टावर को किसी तरह का नुकसान नहीं होता.
FM और आपातकालीन संचार के लिए हो रहा उपयोग
डिजिटल और सैटेलाइट टीवी के दौर में टेरेस्ट्रियल प्रसारण का उपयोग काफी कम हो गया है. फिलहाल इस टावर का इस्तेमाल विभिन्न एफएम रेडियो चैनलों और आपातकालीन संचार सेवाओं के प्रसारण के लिए किया जा रहा है, दूरदर्शन विभाग इस टावर पर जल्द ही मल्टीचैनल ट्रांसमीटर लगाने की तैयारी कर रहा है. ट्रांसमीटर शुरू होने के बाद दर्शक केवल साधारण टीवी एंटीना की मदद से बिना डिश या डीटीएच के करीब 30 टीवी चैनलों का प्रसारण देख सकेंगे, रायपुर का यह ऐतिहासिक टीवी टावर आज भी तकनीक, प्रसारण व्यवस्था और इंजीनियरिंग का एक अनोखा उदाहरण माना जाता है.


