CG News: 20 साल बाद एर्राबोर में बदली तस्वीर, नक्सल प्रभावित गांवों में पहली बार लहराएगा तिरंगा
CG News: नक्सल हिंसा के लंबे दौर के बाद बस्तर में बदलाव की तस्वीर सामने आ रही है, करीब 20 साल पहले जिस एर्राबोर इलाके ने माओवादी हिंसा की भयावह घटनाएं देखी थीं, अब वही क्षेत्र तिरंगे के रंग में रंगने जा रहा है, जुलाई 2006 में एर्राबोर के राहत शिविर पर हुए हमले में महिलाओं और बच्चों समेत बड़ी संख्या में ग्रामीणों की मौत हुई थी, उस समय नक्सली हिंसा से बचने के लिए हजारों ग्रामीण राहत शिविरों में रहने को मजबूर थे.

विजय शर्मा निकालेंगे तिरंगा बाइक रैली
अब उसी एर्राबोर से उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री विजय शर्मा तिरंगा यात्रा की बाइक रैली को रवाना करेंगे, वहीं चिंगावरम से वन मंत्री और सुकमा प्रभारी मंत्री केदार कश्यप भी रैली लेकर निकलेंगे, दोनों रैलियां दोरनापाल में एक साथ होंगी, इसके बाद यात्रा पोलमपल्ली, चिंतागुफा, जगरगुंडा और सिलगेर होते हुए बीजापुर की ओर आगे बढ़ेगी.
92 गांवों में पहली बार फहरेगा तिरंगा
स्वतंत्रता दिवस पर बस्तर के 92 दूरदराज गांवों में पहली बार तिरंगा फहराने की तैयारी है, इनमें सुकमा के 50, बीजापुर के 33 और नारायणपुर के 9 गांव शामिल हैं, ये ऐसे इलाके हैं जहां लंबे समय तक नक्सली हिंसा और भय का असर रहा, अब इन गांवों में ग्रामीण और बच्चे स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम में शामिल होकर राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे.
नक्सल प्रभावित इलाकों में पहुंचेगा आजादी का संदेश
गृह मंत्री विजय शर्मा के मुताबिक, इन गांवों में स्वतंत्रता दिवस समारोह की तैयारियां की जा रही हैं, जिन गांवों में पहले से तिरंगा फहराया जाता रहा है, उन्हें भी अभियान में शामिल किया गया है, साथ ही बस्तर संभाग के उन गांवों तक भी इस अभियान को आगे बढ़ाने की योजना है, जहां अतीत में नक्सली हमले या मुठभेड़ जैसी बड़ी घटनाएं हुई थीं.
डर से विकास और राष्ट्रभक्ति की ओर बस्तर
बस्तर में तिरंगा फहराने की यह पहल सिर्फ स्वतंत्रता दिवस का कार्यक्रम नहीं, बल्कि बदलते माहौल का संदेश भी मानी जा रही है, जिन इलाकों में कभी नक्सली हिंसा के कारण ग्रामीण डर के साये में रहते थे, वहां अब राष्ट्रीय ध्वज और विकास की बात हो रही है, एर्राबोर समेत 92 गांवों में पहली बार तिरंगा फहराना बस्तर में शांति, सुरक्षा और मुख्यधारा से जुड़ने की नई तस्वीर के तौर पर देखा जा रहा है.

