CG News: रोहिणी नक्षत्र और शुभ योगों का संयोग, 4 सितंबर को मनाया जाएगा श्रीकृष्ण जन्मोत्सव
CG News: इस बार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद खास माना जा रहा है, 4 सितंबर को मनाई जाने वाली जन्माष्टमी पर अष्टमी तिथि के साथ रोहिणी नक्षत्र, हर्षण योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग बनने की बात कही जा रही है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भी अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र और वृषभ राशि में चंद्रमा की स्थिति के दौरान हुआ था, इसलिए इस संयोग को विशेष महत्व दिया जा रहा है.

द्वापर युग की ग्रह स्थिति से जुड़ी मान्यता
मान्यता है कि द्वापर युग में मथुरा की कारागार में देवकी और वासुदेव के पुत्र के रूप में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को हुआ था, उस समय रोहिणी नक्षत्र और वृषभ राशि में चंद्रमा की स्थिति बताई जाती है. इसी वजह से जन्माष्टमी पर रोहिणी नक्षत्र का संयोग भक्तों के लिए विशेष धार्मिक महत्व रखता है, इस अवसर पर देशभर में मंदिरों में भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की तैयारियां की जा रही हैं.
रायपुर में मटकी फोड़ प्रतियोगिताओं की तैयारी
राजधानी रायपुर में भी जन्माष्टमी को लेकर उत्साह नजर आने लगा है, शहर के विभिन्न क्षेत्रों में मटकी प्रतियोगिताओं और धार्मिक कार्यक्रमों की तैयारियां शुरू हो गई हैं. कृष्ण मंदिरों को सजाने के साथ विशेष पूजा, भजन, कीर्तन और जन्मोत्सव कार्यक्रमों की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं, जन्माष्टमी की मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव मनाने के लिए श्रद्धालुओं के मंदिरों में पहुंचने की उम्मीद है.
46 मिनट रहेगा पूजा का शुभ समय
ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, इस बार श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की पूजा के लिए मध्यरात्रि का विशेष समय निर्धारित किया गया है, 4 सितंबर की रात 11 बजकर 57 मिनट से 5 सितंबर की रात 12 बजकर 43 मिनट तक पूजा का शुभ मुहूर्त बताया गया है. यानी भक्तों को लड्डू गोपाल की पूजा और जन्मोत्सव मनाने के लिए कुल 46 मिनट का विशेष समय मिलेगा, इस दौरान व्रत, मंत्र जाप और संकल्प को भी शुभ माना जाता है.
4 सितंबर को मनाया जाएगा पर्व
जानकारी के अनुसार, भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 4 सितंबर की रात 2 बजकर 25 मिनट से शुरू होगी और 5 सितंबर की रात 12 बजकर 13 मिनट तक रहेगी, तिथि के आधार पर 4 सितंबर शुक्रवार को जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाएगा. इस दिन मध्यरात्रि में अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र और वृषभ राशि में चंद्रमा का संयोग बनने की बात कही जा रही है, ऐसे में इस बार की जन्माष्टमी धार्मिक आस्था के साथ ज्योतिषीय दृष्टि से भी विशेष मानी जा रही है.
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