CG News: मुख्यमंत्री साय ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर दी श्रद्धांजलि, अंत्योदय के सिद्धांतों को बताया सुशासन का आधार
CG News: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने गुरुवार को राजधानी रायपुर स्थित अपने निवास कार्यालय में एकात्म मानववाद के प्रणेता और प्रखर राष्ट्रचिंतक पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर उनके चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया, इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जीवन मूल्यों, उच्च आदर्शों और राष्ट्रसेवा के प्रति उनके अमूल्य योगदान को याद करते हुए अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की.

अंत्योदय का सिद्धांत और समाज के अंतिम व्यक्ति का उत्थान
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने अपने विचारों के माध्यम से देश के समग्र विकास की एक ऐसी अनुकरणीय दृष्टि प्रस्तुत की, जिसके केंद्र में समाज का अंतिम व्यक्ति खड़ा है, उनका मानना था कि किसी भी विकास की वास्तविक सार्थकता तभी सिद्ध होती है जब उसका प्रत्यक्ष लाभ समाज की अंतिम पंक्ति में जीवन-यापन कर रहे गरीब, वंचित और जरूरतमंद व्यक्ति तक पहुंचे.
‘अंत्योदय दिवस’ के रूप में जनकल्याण का नया संकल्प
पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती को देश भर में ‘अंत्योदय दिवस’ के रूप में मनाया जाता है, मुख्यमंत्री ने कहा कि यह दिन उनके विचारों के अनुरूप समाज के कमजोर वर्गों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के अटूट संकल्प को प्रदर्शित करता है, उनका एकात्म मानववाद का दर्शन आज भी राष्ट्र निर्माण और पारदर्शी शासन व्यवस्था के लिए एक मजबूत प्रेरणास्रोत बना हुआ है.
अंत्योदय के सिद्धांतों पर अग्रसर छत्तीसगढ़ सरकार
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने रेखांकित किया कि राज्य सरकार पंडित दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय के मूल सिद्धांतों को पूरी निष्ठा से आत्मसात करते हुए कार्य कर रही है, सरकार का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के हर नागरिक और दूरस्थ क्षेत्रों तक विकास की प्रमुख योजनाओं का लाभ पहुंचाना है, ताकि राज्य का प्रत्येक वर्ग सशक्त होकर मुख्यधारा से जुड़ सके और आत्मनिर्भर बन सके.
भावी पीढ़ियों को सदैव मार्गदर्शित करेंगे उच्च आदर्श
अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय का संपूर्ण जीवन राष्ट्रसेवा, समर्पण, सादगी और सर्वजन हिताय की भावना का एक उत्कृष्ट प्रतीक रहा, उनके द्वारा बताए गए मार्ग, अंत्योदय का विजन और राष्ट्रप्रेम का भाव आने वाली पीढ़ियों के साथ-साथ समाज को एक सशक्त, समृद्ध और समावेशी भारत के निर्माण के लिए निरंतर प्रेरित और मार्गदर्शित करता रहेगा.

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