CG News: मुख्यमंत्री साय ने मेधावी श्रमिक बच्चों को किया सम्मानित, 7.79 करोड़ की सहायता राशि DBT से जारी
CG News: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राजधानी रायपुर में आयोजित मेधावी छात्र-छात्रा सम्मान समारोह में श्रमिक परिवारों के होनहार बच्चों को बड़ी सौगात दी, इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री नोनी-बाबू मेधावी शिक्षा सहायता योजना के तहत 22 मेधावी विद्यार्थियों को 2-2 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान कर सम्मानित किया।

सीएम ने जताई खुशी
मुख्यमंत्री ने कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद श्रमिक परिवारों के बेटा-बेटियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन कर प्रदेश का नाम रोशन किया है। उन्होंने कहा कि ये सफलता केवल व्यक्तिगत नहीं बल्कि पूरे श्रमिक परिवारों के संघर्ष और मेहनत की पहचान है, सीएम ने बच्चों से कहा कि वे कभी भी खुद को कम न समझें और शिक्षा के माध्यम से अपने भविष्य को ऊंचाइयों तक पहुंचाएं।
सहायता राशि DBT से जारी
कार्यक्रम के दौरान सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए 28,754 पंजीकृत निर्माण श्रमिकों और उनके परिवारों को कुल 7.79 करोड़ रुपये की सहायता राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में ट्रांसफर की।
यह राशि विभिन्न योजनाओं के तहत दी गई, जिनमें शामिल हैं:
• निःशुल्क गणवेश एवं पुस्तक सहायता योजना
• मिनीमाता महतारी जतन योजना
• नोनी सशक्तिकरण सहायता योजना
• छात्रवृत्ति योजना
• औजार सहायता योजना
• साइकिल सहायता योजना
• पेंशन सहायता योजना
श्रमिक परिवारों के लिए 70 योजनाएं संचालित
सीएम साय ने बताया कि राज्य सरकार श्रमिकों के कल्याण के लिए लगभग 70 प्रकार की योजनाएं चला रही है, जिनका उद्देश्य जन्म से लेकर मृत्यु तक श्रमिक परिवारों को सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा देना है, उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि कोई भी श्रमिक परिवार इन योजनाओं से वंचित न रहे।
“श्रमिकों के बच्चे बनेंगे डॉक्टर और इंजीनियर”
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की मंशा है कि श्रमिकों के बच्चे केवल श्रमिक न बनें, बल्कि डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक और प्रशासनिक अधिकारी बनकर प्रदेश और देश की सेवा करें, विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री ने “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के तहत पौधारोपण किया और प्रदेशवासियों से पर्यावरण संरक्षण में भागीदारी की अपील की, इस कार्यक्रम में श्रम विभाग के सचिव, कलेक्टर, जनप्रतिनिधि, श्रमिक संगठनों के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में श्रमिक परिवार मौजूद रहे।




