July 23, 2026 4:31 am

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CG News: छत्तीसगढ़ का जल संरक्षण मॉडल, मोर गांव-मोर पानी अभियान से बदली गांवों की तस्वीर

CG News: छत्तीसगढ़ का जल संरक्षण मॉडल, मोर गांव-मोर पानी अभियान से बदली गांवों की तस्वीर
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CG News: छत्तीसगढ़ का जल संरक्षण मॉडल, मोर गांव-मोर पानी अभियान से बदली गांवों की तस्वीर

CG News: छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में शुरू किया गया “मोर गांव-मोर पानी” महाअभियान अब ग्रामीण जल संरक्षण का प्रभावी मॉडल बनकर सामने आ रहा है. इस अभियान के तहत राज्यभर में जल स्रोतों के संरक्षण, भूजल स्तर बढ़ाने और पारंपरिक तालाबों के पुनर्जीवन के लिए बड़े पैमाने पर काम किया गया है, मानसून के दौरान तैयार की गई जल संरचनाओं में पानी का बेहतर संग्रहण हुआ है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में खेती, पशुपालन, मत्स्य पालन और आजीविका के साधनों को मजबूती मिली है.

CG News: मोर गांव, मोर पानी महा अभियान की शुरुवात,कांकेर में हुई जोरदार पहल, देखें | More Village More Water Campaign Launched Strong Initiative Taken In Kanker

17 अप्रैल को शुरू हुआ था जल संरक्षण अभियान

छत्तीसगढ़ सरकार ने इस अभियान की शुरुआत 17 अप्रैल को जशपुर से की थी. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने “नवा तरिया, आय के जरिया” कार्यक्रम के तहत प्रदेश में 500 नए सामुदायिक तालाबों के निर्माण की नींव रखी थी, इस अभियान का मुख्य उद्देश्य बारिश के पानी को संरक्षित करना, भूजल स्तर में सुधार लाना, पुराने जल स्रोतों को फिर से जीवित करना और किसानों को सिंचाई की बेहतर सुविधा उपलब्ध कराना है.

CG News: मोर गांव, मोर पानी महा अभियान की शुरुवात,कांकेर में हुई जोरदार पहल, देखें | More Village More Water Campaign Launched Strong Initiative Taken In Kanker

मानसून में दिखा अभियान का असर

अप्रैल से जून के बीच तेजी से तैयार की गई जल संरचनाओं का फायदा मानसून में दिखाई दिया. नए तालाब, डबरियां, रिचार्ज पिट, ट्रेंच और अन्य जल संरक्षण संरचनाएं बारिश के पानी से भर गईं, इससे कई क्षेत्रों में भूजल स्तर में सुधार हुआ और गर्मियों में होने वाली पानी की समस्या को कम करने में मदद मिली, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने “मोर गांव मोर पानी” अभियान पर आधारित पुस्तिका का विमोचन करते हुए कहा कि यह पहल अब जनभागीदारी से जनआंदोलन का रूप ले चुकी है, अभियान के तहत प्रदेश की 11 हजार से अधिक ग्राम पंचायतों में जल संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ाई गई है. वहीं सैकड़ों क्लस्टर में हजारों लोगों को जल प्रबंधन की जानकारी और प्रशिक्षण दिया गया है.

A new example of water conservation through public participation

जिलों में बने जल संरक्षण के सफल उदाहरण

महासमुंद जिले में लाखों जल संरक्षण संरचनाओं के निर्माण से बारिश के पानी को रोकने में बड़ी सफलता मिली है. बालोद जिले में भी बड़ी संख्या में जल संरचनाएं तैयार कर अतिरिक्त जल संग्रहण क्षमता विकसित की गई है, बलौदाबाजार जिले में जल अवशोषण ट्रेंच के माध्यम से बारिश के पानी को जमीन में पहुंचाने का काम किया गया, जिससे भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा मिला, बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के खनन प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन, उद्योग और ग्रामीणों के सहयोग से जल संकट दूर करने के प्रयास किए गए, सीएसआर फंड के माध्यम से पाइपलाइन, जल स्रोत विकास, नए बोरवेल और अन्य सुविधाओं पर काम किया गया, जिससे ग्रामीणों को पेयजल और निस्तारी पानी की समस्या से राहत मिली.

वैज्ञानिक तकनीक से मजबूत हो रहा जल संरक्षण

दंतेवाड़ा में GIS आधारित रिज टू वैली तकनीक से जल संरक्षण कार्य किए गए. यहां गैबियन स्ट्रक्चर, कंटूर ट्रेंच और स्टोन चेक डैम जैसे कार्यों से जल संरक्षण के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिला, बिलासपुर में इंजेक्शन वेल तकनीक के जरिए बारिश के पानी को सीधे भूजल में पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है. वहीं बंद पड़े बोरवेलों को दोबारा उपयोगी बनाने और कम पानी वाली फसलों को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया है.

जल संरक्षण से बढ़ी ग्रामीणों की आय

सरगुजा जिले में आजीविका डबरियों, नए तालाबों और पुराने तालाबों के गहरीकरण का काम किया गया. इन जल संरचनाओं के भरने से सिंचाई, पशुपालन और मत्स्य पालन को फायदा मिला है.
“मोर गांव-मोर पानी” अभियान ने जल संरक्षण को केवल पर्यावरण से जुड़ा मुद्दा नहीं रहने दिया, बल्कि इसे खेती, रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ दिया है, लगातार मिल रहे सकारात्मक परिणाम यह साबित कर रहे हैं कि जनभागीदारी, आधुनिक तकनीक और प्रशासनिक प्रयासों से छत्तीसगढ़ जल सुरक्षा की दिशा में एक मजबूत उदाहरण बन सकता है.

यह भी पढ़ें : CG News: छत्तीसगढ़ के 3 लाख कर्मचारियों की मांगों पर सीएम साय का बड़ा भरोसा, बीएमएस प्रतिनिधिमंडल से हुई चर्चा

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