CG News: छत्तीसगढ़ ग्रामोद्योग बजट 2026-27: कुटीर उद्योग, बुनकरों और शिल्पियों को सशक्त बनाने पर सरकार का फोकस
CG News: छत्तीसगढ़ सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए ग्रामोद्योग विभाग के अंतर्गत 228 करोड़ 84 लाख 90 हजार रुपये की अनुदान मांग विधानसभा में पारित की है, यह बजट गजेन्द्र यादव से संबंधित विभाग का है, मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विकसित भारत की संकल्पना के अनुरूप राज्य सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है.
ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
मंत्री ने बताया कि रेशम, हाथकरघा, हस्तशिल्प विकास बोर्ड, खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड और माटीकला बोर्ड के माध्यम से कई हितग्राही योजनाएं संचालित की जा रही हैं, इन योजनाओं के जरिए प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाए जा रहे हैं और लगभग 3 लाख 15 हजार से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिल रहा है.
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रेशम उत्पादन के विस्तार पर जोर
राज्य में टसर रेशम उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2026-27 में नैसर्गिक और पालित टसर कोसा उत्पादन विकास योजना के अंतर्गत 59 करोड़ 82 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है, इस योजना के माध्यम से राज्य में 21 करोड़ से अधिक टसर ककून उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, इसके साथ ही मलबरी रेशम विकास और विस्तार को प्रोत्साहित करने के लिए 4 करोड़ 25 लाख रुपये तथा प्रशिक्षण एवं अनुसंधान योजनाओं के लिए 76 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे हजारों हितग्राहियों को आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा.
हाथकरघा और बुनकरों को मिलेगी नई सहायता
प्रदेश के बुनकरों को प्रशिक्षण, उन्नत करघों की उपलब्धता, कर्मशाला भवन, गोदाम निर्माण और डिजाइन विकास जैसे कार्यों के लिए समग्र हाथकरघा विकास योजना संचालित की जा रही है, वर्ष 2026-27 के बजट में इसके लिए 5 करोड़ 60 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे बुनकरों को आधुनिक तकनीकों और सुविधाओं का लाभ मिलेगा.
बुनकर वर्कशेड-सह-आवास योजना
बुनकरों को आवास उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बुनकर वर्कशेड-सह-आवास योजना के तहत वर्ष 2026-27 में 4 करोड़ 90 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है, इस योजना के माध्यम से आवासहीन बुनकरों को रहने और कार्य करने के लिए उचित स्थान उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे उनके जीवन स्तर में सुधार होगा.
खादी एवं ग्रामोद्योग के माध्यम से स्वरोजगार
छत्तीसगढ़ खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं, मुख्यमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत वर्ष 2026-27 में परिवार आधारित इकाइयों की स्थापना के लिए 8 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है, जिससे ग्रामीण युवाओं को स्वरोजगार के अवसर मिल सकेंगे.
हस्तशिल्प कला को मिलेगा प्रोत्साहन
प्रदेश की पारंपरिक शिल्प कलाओं जैसे बेलमेटल, लौह शिल्प, बांस शिल्प, काष्ठ शिल्प, पत्थर शिल्प और टेराकोटा शिल्प को बढ़ावा देने के लिए छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प विकास बोर्ड के माध्यम से शिल्पियों को प्रशिक्षण और आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं, इसके लिए वर्ष 2026-27 में 3 करोड़ 90 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है.

पीएम एकता मॉल से मिलेगा बाजार
प्रदेश की पारंपरिक कला और “वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट” को बढ़ावा देने के लिए पी.एम. एकता मॉलकी स्थापना की गई है, इस परियोजना के लिए वर्ष 2026-27 में 93 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है, जिससे राज्य के शिल्प उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार मिल सकेगा.
माटीकला शिल्पियों को मिल रही आधुनिक सुविधा
छत्तीसगढ़ माटीकला बोर्ड के माध्यम से प्रदेश के कुम्हारों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए पंजीकृत शिल्पियों को निःशुल्क विद्युत चाक उपलब्ध कराए जा रहे हैं, अब तक हजारों कुम्हारों को इसका लाभ मिल चुका है, वर्ष 2026-27 में इसके लिए 3 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है.
माटी शिल्प के लिए ग्लेजिंग यूनिट
माटी शिल्प उत्पादों में मूल्य संवर्धन के लिए राज्य में कई ग्लेजिंग यूनिट संचालित की जा रही हैं, इनके संचालन और जशपुर जिले के कुनकुरी विकासखंड के ग्राम गोरिया में नई यूनिट की स्थापना के लिए वर्ष 2026-27 में 4 करोड़ 30 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है.
ग्रामीण उद्योगों से रोजगार और संस्कृति का संरक्षण
मंत्री गजेन्द्र यादव ने कहा कि ग्रामोद्योग विभाग की योजनाएं न केवल ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाएंगी, बल्कि प्रदेश की पारंपरिक कला, संस्कृति और कुटीर उद्योगों के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी, सरकार का लक्ष्य ग्रामीण उद्योगों को मजबूत बनाकर राज्य की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देना है.



