CG News: दिल्ली में गूंजा छत्तीसगढ़ की जल योद्धाओं का नाम, अमृत मित्र महोत्सव में महिलाओं ने साझा किए अनुभव
CG News: नई दिल्ली के भारत मंडपम में केन्द्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा आयोजित “अमृत मित्र महोत्सव” में छत्तीसगढ़ की महिलाओं ने अपने कार्यों से देशभर में पहचान बनाई, इस कार्यक्रम में बिलासपुर नगर निगम की रुक्मिणी गोस्वामी और लोरमी की हेमलता खत्री ने केंद्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल की उपस्थिति में अपने अनुभव साझा किए.
एक हजार अमृत मित्र शामिल
यह राष्ट्रीय सम्मेलन अटल नवीकरण और शहरी परिवर्तन मिशन (AMRUT 2.0) के तहत शहरी जल प्रबंधन और सतत विकास में महिलाओं की भूमिका को रेखांकित करने के लिए आयोजित किया गया था, इसमें देशभर से लगभग 1000 “अमृत मित्र” शामिल हुए, जिनमें छत्तीसगढ़ की 75 महिलाएं भी शामिल थीं.

वीमेन फॉर ट्री अभियान
छत्तीसगढ़ की ये महिलाएं अपने-अपने नगरीय निकायों में वृक्षारोपण, जल गुणवत्ता परीक्षण, जल संरचनाओं के संचालन और सामुदायिक जल संरक्षण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य कर रही हैं, “वीमेन फॉर ट्री” अभियान के तहत वे हरित क्षेत्रों के संरक्षण और पर्यावरण जागरूकता को बढ़ावा देने में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं.
सुरक्षित पेयजल और जागरूकता अभियान
अमृत मित्र महिलाएं शहरों में जल गुणवत्ता की जांच, जल उपचार संयंत्रों (WTP) और वितरण नेटवर्क के संचालन में सहयोग कर रही हैं, साथ ही जल संरक्षण और “कचरे से कंचन” जैसे अभियानों के माध्यम से नागरिकों को पर्यावरण संरक्षण के लिए जागरूक भी कर रही हैं.
राष्ट्रीय मंच पर साझा किए अनुभव
बिलासपुर की रुक्मिणी गोस्वामी ने कार्यक्रम में कहा कि, वे केवल पौधे नहीं लगा रहीं, बल्कि अपने शहर के पर्यावरण और भविष्य को सुरक्षित बनाने का काम कर रही हैं, इस पहल से उन्हें आजीविका का अवसर भी मिला है जिससे वे अपने परिवार की आय में योगदान दे पा रही हैं, वहीं लोरमी की हेमलता खत्री ने बताया कि, वे वृक्षारोपण के साथ पौधों की देखभाल बच्चों की तरह करती हैं और उन्हें बढ़ते देखना बेहद संतोष देता है.
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने दी बधाई
उप मुख्यमंत्री और नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव ने कहा कि, भारत मंडपम जैसे प्रतिष्ठित राष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ़ की महिलाओं द्वारा अपने अनुभव साझा करना पूरे प्रदेश के लिए गर्व की बात है, “वीमेन फॉर ट्री – अमृत मित्र योजना” के माध्यम से महिलाओं को पर्यावरण संरक्षण के साथ आजीविका का अवसर भी मिल रहा है, जिससे वे सशक्त और आत्मनिर्भर बन रही हैं.




