CG News: डिजिटल युग में साहित्य: लेखक-पाठक का नया रिश्ता, रायपुर साहित्य उत्सव में हुआ सार्थक विमर्श
CG News: रायपुर साहित्य उत्सव 2026 के दूसरे दिन लाला जगदलपुरी मंडप में आयोजित परिचर्चा ‘डिजिटल युग के लेखक और पाठक’ में साहित्य, लेखन और पाठकीय संस्कृति में हो रहे बदलावों पर गहन चर्चा हुई, सूत्रधार पत्रकार अनिल द्विवेदी के संचालन में यह परिचर्चा यह स्पष्ट कर गई कि, डिजिटल माध्यम ने साहित्य का स्वरूप बदल दिया है, लेकिन उसकी आत्मा और रचनात्मकता अभी भी उतनी ही प्रासंगिक है.

किताबों का महत्व अभी भी बरकरार
लेखक, कवि और शिक्षक सर्वेश तिवारी ने कहा कि, मुद्रित किताबों का अनुभव डिजिटल माध्यम पूरी तरह नहीं दे सकता, उन्होंने बताया कि, युवा और बच्चे ऑनलाइन पढ़ रहे हैं, लेकिन लेखक की सफलता का पैमाना पुरस्कार नहीं, बल्कि पाठकों की संख्या होनी चाहिए, उनका मानना है कि, जितने अधिक पाठक, उतनी ही रचना की सार्थकता और पहुंच.
इंटरनेट ने साहित्य को नए रास्ते दिए
लेखक नवीन चौधरी ने डिजिटल मीडिया की ताकत को रेखांकित करते हुए कहा कि, इंटरनेट ने साहित्य के लिए नए रास्ते खोले हैं, डिजिटल प्लेटफॉर्म के कारण वरिष्ठ रचनाकारों की रचनाएं फिर से लोकप्रिय हो रही हैं और उनकी किताबों की रॉयल्टी भी बढ़ रही है, इंटरनेट ने पढ़ने और पढ़ाने में रुचि जगाने में अहम भूमिका निभाई है.
किंडल और ऑडियो बुक्स से बढ़ी सुलभता
प्रसार भारती की सलाहकार स्मिता मिश्रा ने कहा कि, डिजिटल माध्यम, किंडल और ऑडियो बुक्स ने किताबों को पढ़ना आसान, सस्ता और सुविधाजनक बना दिया है, अब किताबें सिर्फ पढ़ी ही नहीं जा रही, बल्कि सुनी भी जा रही हैं, लेखन का स्वरूप बदल सकता है, लेकिन रचनात्मकता की भूख कभी कम नहीं होनी चाहिए.
साहित्य का लोकतांत्रीकरण हुआ है
वरिष्ठ पत्रकार संजीव कुमार सिन्हा ने कहा कि, इंटरनेट के आने के बाद साहित्य का सही मायनों में लोकतांत्रीकरण हुआ है, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने रचनाओं को पाठकों तक पहुंचाना आसान बना दिया है, युवा डिजिटल माध्यमों पर लिख और पढ़ रहे हैं, जो भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत है.
डिजिटल युग ने नया मंच दिया
परिचर्चा का निष्कर्ष प्रस्तुत करते हुए सूत्रधार अनिल द्विवेदी ने कहा कि, डिजिटल युग ने देखने-देखाने, सुनने-सुनाने, पढ़ने और पढ़ाने का नया दौर शुरू किया है, यह युग सभी को नया मंच प्रदान कर रहा है और साहित्य को नए पाठक व नए लेखक दे रहा है.




