CG Special Story: राज्य गठन से पहले ही कुरुद में स्थापित हुआ था छत्तीसगढ़ महतारी मंदिर, जानिए 1995 से जुड़ा ऐतिहासिक महत्व
CG Special Story: छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक अस्मिता, मातृशक्ति और क्षेत्रीय स्वाभिमान का प्रतीक छत्तीसगढ़ महतारी मंदिर धमतरी जिले के कुरुद में स्थित है. इस मंदिर का इतिहास छत्तीसगढ़ राज्य के गठन से भी पुराना है. प्रदेश की स्थापना 1 नवंबर 2000 को हुई थी, लेकिन इससे चार साल पहले ही वर्ष 1995 में कुरुद में छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा हो चुकी थी. आज यह मंदिर धार्मिक आस्था के साथ प्रदेश के गौरवशाली इतिहास और क्षेत्रीय पहचान का महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है.

राज्य गठन से पहले रखी गई थी मंदिर निर्माण की नींव
मध्यप्रदेश शासनकाल के दौरान जब पृथक छत्तीसगढ़ राज्य की मांग जोर पकड़ रही थी, उसी दौर में कुरुद में छत्तीसगढ़ महतारी मंदिर निर्माण की पहल हुई. वर्ष 1995 में तत्कालीन विधायक गुरुमुख सिंह होरा ने मंदिर निर्माण का संकल्प लिया था. संत एवं भागवताचार्य पवन दीवान की प्रेरणा से वर्ष 1996 में मंदिर का निर्माण पूरा हुआ और छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा की विधिवत प्राण-प्रतिष्ठा की गई. इस तरह अलग राज्य के गठन से पहले ही कुरुद में क्षेत्रीय अस्मिता और स्वाभिमान का प्रतीक स्थापित हो गया था.
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धान की बाली और हसिया में झलकती है छत्तीसगढ़ की संस्कृति
कुरुद स्थित छत्तीसगढ़ महतारी मंदिर की प्रतिमा अपने विशिष्ट स्वरूप के लिए पहचानी जाती है. पारंपरिक परिधान और आभूषणों से सुसज्जित माता के एक हाथ में धान की बाली और दूसरे हाथ में हसिया है. माता का मुकुट, छत्र, करधन, पायल और चूड़ियां प्रतिमा की सुंदरता को विशेष बनाते हैं. धान की बाली और हसिया छत्तीसगढ़ की कृषि संस्कृति, मेहनतकश किसानों और ग्रामीण जीवन का प्रतीक माने जाते हैं. फसल पकने के मौसम में धान की बालियों से माता का विशेष शृंगार भी किया जाता है. प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में स्थापित छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमाओं के प्रचलित स्वरूप की प्रेरणा भी कुरुद मंदिर से जुड़ी बताई जाती है.

महाआरती और नवरात्रि में उमड़ते हैं श्रद्धालु
मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा और प्रबंधक सेवक राम के अनुसार, यहां प्रतिदिन शाम 7 बजे महाआरती की जाती है. मंदिर परिसर में महाकाली की प्रतिमा भी स्थापित है, जहां श्रद्धालु पूजा-अर्चना करते हैं. चैत्र और क्वांर नवरात्रि के अवसर पर मंदिर में मनोकामना ज्योति प्रज्ज्वलित की जाती है. इस दौरान धार्मिक आयोजन के साथ मेला-मड़ई भी आयोजित होता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं.
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राज्योत्सव पर जनप्रतिनिधियों और स्वच्छता मित्रों ने की पूजा-अर्चना
छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर कुरुद स्थित महतारी मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की गई. नगर पालिका अध्यक्ष ज्योति चंद्राकर, विधायक प्रतिनिधि भानु चंद्राकर, सीएमओ महेंद्र गुप्ता और स्वच्छता मित्रों ने मंदिर पहुंचकर माता के दर्शन किए और प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की, इस अवसर पर नगर पालिका अध्यक्ष ज्योति चंद्राकर ने कहा कि कुरुद का यह मंदिर पूरे छत्तीसगढ़ की अस्मिता और स्वाभिमान से जुड़ा हुआ है. उन्होंने कहा कि राज्योत्सव के अवसर पर शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाने में योगदान देने वाले स्वच्छता मित्रों के साथ महतारी के दरबार में शीश नवाना गर्व की बात है. कुरुद का यह मंदिर आज भी प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान और क्षेत्रीय गौरव की याद दिलाता है.

