शारदीय नवरात्र 2026: देवी मंदिरों का गढ़ है रायपुर, जानिए 150 साल से भी अधिक पुराने इन ऐतिहासिक मंदिरों की अनोखी कहानियां
शारदीय नवरात्र 2026: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर सिर्फ अपने तीव्र विकास के लिए ही नहीं, बल्कि प्राचीन देवी मंदिरों के गढ़ के रूप में भी देश-दुनिया में अपनी एक अलग पहचान रखता है, यहाँ का प्रसिद्ध पुरानी बस्ती क्षेत्र मंदिरों का एक ऐसा अनूठा केंद्र है जहाँ महज दो किलोमीटर के दायरे में स्थित पांच प्राचीन मंदिरों में रोजाना हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए उमड़ते हैं और हर मंदिर की अपनी एक अलग व अनूठी ऐतिहासिक कहानी जुड़ी हुई है.

मां महामाया देवी मंदिर, पुरानी बस्ती
राजधानी की पहचान से जुड़ा सबसे प्रमुख मंदिर पुरानी बस्ती का महामाया मंदिर है, जिसकी स्थानीय मान्यता के अनुसार उम्र 5,000 साल से भी अधिक पुरानी बताई जाती है, किवदंती है कि राजा मोरध्वज को नदी के किनारे एक काला पत्थर मिला जिस पर नाग फन फैलाए बैठा था, और आकाशवाणी के बाद राजा द्वारा रोके जाने पर वह प्रतिमा वहीं स्थापित हो गई जो आज महामाया देवी के रूप में पूजी जाती है.

मां दंतेश्वरी मंदिर, कुशालपुर चौक
कुशालपुर चौक पर स्थित मां दंतेश्वरी का यह मंदिर करीब 200 साल पुराना है, जिसकी सबसे खास और अनोखी बात इसकी पूजा-अर्चना की परंपरा है, जहाँ आमतौर पर देवी मंदिरों में ब्राह्मण पुजारी होते हैं, वहीं इस मंदिर में यादव समाज के लोग पीढ़ियों से पूजा करते आ रहे हैं, मान्यता है कि एक ग्वालिन द्वारा गाय के थन से अपने आप पत्थर पर दूध गिरने की घटना देखने के बाद इस पवित्र स्थल पर मंदिर की स्थापना की गई थी.
![]()
कंकाली मठ, ब्राह्मण पारा
पुरानी बस्ती से सटे ब्राह्मणपारा में स्थित कंकाली मठ की स्थापना लगभग 600 साल पहले नागा साधुओं द्वारा की गई थी, बताया जाता है कि उस समय यह पूरा क्षेत्र एक श्मशान घाट हुआ करता था और कंकालों के बीच देवी प्रतिमा स्थापित होने के कारण इसका नाम कंकाली पड़ा, इस मठ की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह साल भर बंद रहता है और इसके कपाट केवल दशहरे के दिन ही खोले जाते हैं.

शीतला माता मंदिर और पुरानी परंपराएं
पुरानी बस्ती में अमीनपारा थाने के पास स्थित शीतला माता मंदिर लगभग 250 साल पुराना एक बेहद प्राचीन धार्मिक स्थल है, इस मंदिर की यह विशेषता है कि यहाँ किसी मूर्ति की नहीं बल्कि जमीन से खुद प्रकट हुए पत्थर रूपी पिंड की पूजा की जाती है, जहाँ माता को ठंडे भोजन और मिठाई का भोग लगाया जाता है और बरसों से एक ही परिवार इस मंदिर की पवित्र परंपरा को पूरी निष्ठा के साथ निभाता आ रहा है.

One Response