CG News: 75 दिनों तक चलने वाले बस्तर दशहरा का सीएम साय और राष्ट्रपति को दिया गया आमंत्रण
CG News: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा में शामिल होने का औपचारिक आमंत्रण मिला है, बस्तर दशहरा समिति के एक विशेष प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से सौजन्य मुलाकात की, इस दौरान समिति के सदस्यों ने बस्तर की परंपरा के अनुसार मुख्यमंत्री को ‘पागा’ (पगड़ी) पहनाकर सम्मानित किया और उन्हें 75 दिनों तक चलने वाले इस ऐतिहासिक उत्सव में शामिल होने का न्यौता दिया.

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भी दिया गया आमंत्रण
बस्तर दशहरा की भव्यता और अंतरराष्ट्रीय पहचान को देखते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू और छत्तीसगढ़ के संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने नई दिल्ली में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की, उन्होंने राष्ट्रपति को इस गौरवशाली सांस्कृतिक परंपरा और जनजातीय विरासत के प्रतीक महापर्व में सम्मिलित होने का आत्मीय न्यौता दिया.
75 दिनों तक चलने वाला अनोखा पर्व
छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में आयोजित होने वाला बस्तर दशहरा देश का सबसे लंबा चलने वाला लोक पर्व है, जो पूरे 75 दिनों तक अलग-अलग पारंपरिक रस्मों के साथ मनाया जाता है, इस अनूठे उत्सव की शुरुआत श्रावण मास की हरियाली अमावस्या से होती है और इसका समापन आश्विन मास में होता है, यह पर्व छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय आस्था और अटूट परंपराओं का प्रतीक माना जाता है.

नहीं होता रावण दहन
सामान्यतः देश भर में दशहरा रावण दहन और भगवान राम की विजय के रूप में मनाया जाता है, लेकिन बस्तर दशहरा में रावण के पुतले का दहन नहीं किया जाता, यह उत्सव मुख्य रूप से बस्तर की कुलदेवी और स्थानीय आराध्य देवी मां दंतेश्वरी की पूजा-अर्चना और आदिवासी रीति-रिवाजों को समर्पित होता है.
15वीं शताब्दी से जुड़ी है ऐतिहासिक परंपरा
बस्तर दशहरा का इतिहास 600 साल से भी अधिक पुराना है, ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार इस महान उत्सव की शुरुआत 15वीं शताब्दी में काकतीय वंश के प्रतापी राजा महाराजा पुरुषोत्तम देव के शासनकाल में हुई थी, तब से लेकर आज तक यह परंपरा निरंतर और पूरी निष्ठा के साथ निभाई जा रही है.

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