CG News: बस्तर में पूर्व नक्सली महिलाओं ने जवानों को बांधी राखी, 25 साल बाद रिश्तों की नई शुरुआत
CG News: बस्तर के भानुप्रतापपुर से रक्षाबंधन की ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने वर्षों पुराने संघर्ष के बीच रिश्तों और भरोसे की नई कहानी लिखी. करीब 25 साल तक नक्सली संगठन का हिस्सा रहीं मीना और अन्य पूर्व नक्सली महिलाओं ने सुरक्षा बल के जवानों की कलाई पर राखी बांधी. कभी जिस वर्दी से दूरी और टकराव का रिश्ता रहा, उसी जवान की कलाई पर राखी बांधकर उन्होंने भाई-बहन के रिश्ते की शुरुआत की.
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जवानों ने भी बहनों का किया स्वागत
सुरक्षा बल के कैंप में हुए इस आयोजन के दौरान जवानों ने पूर्व नक्सली महिलाओं को बहन के रूप में स्वीकार किया. उन्होंने राखी बंधवाई, शगुन दिया और मिठाई खिलाकर इस रिश्ते को सम्मान दिया. आयोजन में महिला पुलिसकर्मियों ने भी हिस्सा लिया. कुछ समय के लिए यहां संघर्ष के दो पक्ष नजर नहीं आए, बल्कि भाई-बहन के रूप में एक साथ खड़े लोग दिखाई दिए.

एसपी ने बताया विश्वास बहाली का प्रयास
कांकेर एसपी निखिल राखेचा ने इस पहल को नक्सल समस्या के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास बताया. उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन के इस आयोजन के जरिए रिश्तों को सामान्य बनाने और विश्वास कायम करने का संदेश दिया गया है. उनके मुताबिक, ऐसी पहल केवल त्योहार मनाने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि मुख्यधारा में लौट चुके लोगों और समाज के बीच भरोसा मजबूत करने में भी मदद करती है.
मीना के लिए नया सामाजिक रिश्ता
करीब ढाई दशक तक नक्सली संगठन में रहने के बाद मुख्यधारा में लौटना मीना और उनके साथ आई महिलाओं के लिए बदलाव का बड़ा दौर है. जंगल, संघर्ष और हथियारों से जुड़ी जिंदगी के बाद जवानों की कलाई पर राखी बांधना उनके लिए एक नए अध्याय की शुरुआत जैसा रहा. यह तस्वीर इस बात का संकेत भी देती है कि अतीत की कड़वाहट को पीछे छोड़कर समाज के साथ नए रिश्ते बनाने की कोशिश आगे बढ़ रही है.
राखी ने दिया शांति और भरोसे का संदेश
बस्तर लंबे समय तक नक्सली हिंसा और भय की पहचान से जुड़ा रहा, लेकिन अब यहां विकास के साथ सामाजिक विश्वास बहाली की तस्वीरें भी सामने आ रही हैं. भानुप्रतापपुर का यह रक्षाबंधन उसी बदलाव का मानवीय उदाहरण बना. जहां कभी बंदूक लोगों के बीच दूरी का कारण थी, वहीं इस बार उसी जगह राखी का धागा नजर आया. यह पहल बताती है कि स्थायी शांति के लिए सिर्फ हिंसा का खत्म होना नहीं, बल्कि समाज में भरोसा और स्वीकार्यता लौटना भी जरूरी है.
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