CG News: आरंग के नवागांव में 500 साल पुराना शिव मंदिर, दुर्लभ प्रतिमाओं और नौ पत्तियों वाले बेल वृक्ष का रहस्य
CG News: छत्तीसगढ़ के आरंग से करीब 22 किलोमीटर दूर स्थित नवागांव, अपने प्राचीन मंदिर, धार्मिक परंपराओं और रहस्यमयी मान्यताओं के लिए खास पहचान रखता है. करीब 500 साल पुरानी धार्मिक धरोहर से जुड़े इस परिसर में सावन के दौरान श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ जाती है. इतिहास और आस्था से जुड़े कई ऐसे प्रमाण यहां देखने को मिलते हैं, जो इस जगह को सामान्य धार्मिक स्थलों से अलग बनाते हैं.

प्राचीन शिव मंदिर में दुर्लभ प्रतिमाएं
नवागांव का प्राचीन शिव मंदिर कलचुरीकालीन ईंटों से निर्मित बताया जाता है और इसे करीब 16वीं शताब्दी का माना जाता है. समय के साथ मंदिर का मूल स्वरूप काफी प्रभावित हुआ, लेकिन यहां से जुड़ी कई धार्मिक धरोहरें आज भी सुरक्षित हैं. मंदिर का प्राचीन शिवलिंग अब पास स्थित अंबिका मंदिर में स्थापित है. परिसर में नंदी, कुबेर, कार्तिकेय, वीरभद्र और गणेश की प्रतिमाओं के साथ अष्टधातु की गणेश प्रतिमा और पारद शिवलिंग भी मौजूद हैं.
हनुमान के पांच भाइयों की प्रतिमाएं
इस मंदिर परिसर की खास बात यहां मौजूद हनुमान से जुड़ी दुर्लभ प्रतिमाएं भी हैं. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यहां हनुमान के पांच भाइयों से संबंधित प्रतिमाएं स्थापित हैं. इसके अलावा स्फटिक से बने द्वादश ज्योतिर्लिंग और बड़ी संख्या में छोटे शिवलिंग भी श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित करते हैं. धार्मिक मान्यताओं के कारण इन सभी धरोहरों को विशेष महत्व दिया जाता है.

तीन साधुओं की जीवंत समाधियां
मंदिर परिसर में तीन साधुओं की जीवंत समाधियां भी बताई जाती हैं, जो इस स्थान की आध्यात्मिक पहचान को और गहरा करती हैं. यहां एकमुखी, पंचमुखी और अष्टमुखी रुद्राक्ष की दुर्लभ मालाएं भी संरक्षित होने की बात कही जाती है. यही वजह है कि नवागांव केवल पूजा का स्थल नहीं, बल्कि धार्मिक विरासत और स्थानीय परंपराओं का केंद्र भी माना जाता है.
नौ पत्तियों वाला बेल वृक्ष बना आकर्षण
नवागांव की सबसे अनोखी पहचान यहां मौजूद बेल का वृक्ष है. सामान्य तौर पर बेलपत्र तीन पत्तियों के समूह में देखा जाता है, लेकिन यहां नौ पत्तियों वाला बेलपत्र मिलने की स्थानीय मान्यता है. सावन में इसी विशेष बेल वृक्ष के दर्शन और पूजा के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. यही मान्यता इस प्राचीन परिसर को रहस्यमयी और आकर्षक बनाती है.
भैरव बाबा को मदिरा अर्पित करने की परंपरा
परिसर में भैरव बाबा का मंदिर भी स्थित है, जहां स्थानीय परंपरा के अनुसार प्रतिदिन मदिरा अर्पित की जाती है. भैरव जयंती के अवसर पर यहां विशेष पूजा, अभिषेक और धार्मिक आयोजन किए जाते हैं. मंदिर से जुड़ी यह परंपरा भी नवागांव की विशिष्ट धार्मिक पहचान का हिस्सा मानी जाती है.
दस पीढ़ियों से हो रहा संरक्षण
स्थानीय जानकारी के अनुसार, आरंग का दाऊ अग्रवाल परिवार कई पीढ़ियों से इस धार्मिक परिसर की देखरेख करता आ रहा है. परिवार की करीब दस पीढ़ियों ने मंदिर की परंपराओं और यहां मौजूद धार्मिक धरोहरों के संरक्षण में योगदान दिया है. सावन के महीने में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के कारण इस स्थल की धार्मिक पहचान और भी प्रमुख हो जाती है.
आस्था और इतिहास का अनोखा संगम
नवागांव का यह प्राचीन परिसर, करीब पांच शताब्दियों पुरानी धरोहर, दुर्लभ प्रतिमाओं, साधुओं की समाधियों और नौ पत्तियों वाले बेल वृक्ष के कारण खास माना जाता है. सावन में यहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह स्थान आस्था का केंद्र बन जाता है, वहीं इतिहास और संस्कृति में रुचि रखने वालों के लिए भी यह जगह छत्तीसगढ़ की प्राचीन धार्मिक विरासत को करीब से समझने का अवसर देती है.
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