CG News: छत्तीसगढ़ की महिलाओं को मिली नई ताकत, आत्मनिर्भरता की ओर बड़ा कदम
CG News: छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण को विकास की महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है. सरकार की योजनाओं के जरिए महिलाओं को आर्थिक सहायता, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है. महतारी वंदन योजना के तहत 66 लाख से अधिक महिलाओं को हर महीने एक हजार रुपये की सहायता मिलने का दावा किया गया है. वहीं 2026 को महतारी गौरव वर्ष के रूप में मनाते हुए महिलाओं के लिए कई नई पहलों पर जोर दिया जा रहा है.

बेटियों और महिलाओं के लिए बढ़ी योजनाएं
बेटियों के भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए रानी दुर्गावती योजना के तहत 18 वर्ष की उम्र पूरी होने पर आर्थिक सहायता देने की योजना है. इसके अलावा मातृत्व, पोषण और बाल संरक्षण से जुड़ी योजनाओं के लिए भी बजट में राशि निर्धारित की गई है. महिलाओं के लिए महतारी सदन विकसित किए जा रहे हैं, जहां प्रशिक्षण, आजीविका और सामाजिक गतिविधियों के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है. महिला सुरक्षा के लिए प्रदेश में सखी वन-स्टॉप सेंटरों के जरिए कानूनी, चिकित्सकीय और परामर्श जैसी सुविधाएं भी दी जा रही हैं.
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स्वयं सहायता समूहों से बढ़ी कमाई की राह
महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में स्वयं सहायता समूहों की भूमिका भी महत्वपूर्ण बताई जा रही है. बिहान मिशन के तहत लाखों महिलाएं समूहों से जुड़कर कृषि, पशुपालन, खाद्य प्रसंस्करण, हस्तशिल्प और अन्य गतिविधियों में काम कर रही हैं. सरकार के अनुसार प्रदेश में 10 लाख से अधिक लखपति दीदी तैयार हो चुकी हैं. महिला समूहों के उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचाने के लिए यूनिटी मॉल जैसी परियोजनाओं पर भी काम किया जा रहा है.
शिक्षा और रोजगार पर भी फोकस
महिलाओं और बेटियों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए सिलाई मशीन, ई-रिक्शा, स्वरोजगार ऋण और निर्माण श्रमिक सहायता जैसी योजनाएं संचालित की जा रही हैं. मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के जरिए जरूरतमंद परिवारों की बेटियों को सहायता देने की व्यवस्था है. वहीं छात्राओं के लिए सुशिक्षा योजना और किशोरियों की स्वच्छता के लिए शुचिता योजना जैसी पहलें भी जारी हैं. इन प्रयासों का उद्देश्य महिलाओं को शिक्षा, कौशल और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है.

स्थानीय उत्पादों को मिल रही नई पहचान
महिला समूहों द्वारा तैयार उत्पादों को स्थानीय बाजार के साथ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की कोशिश की जा रही है. जशप्योर जैसे महिला संचालित ब्रांड, मिलेट कैफे और स्थानीय उत्पादों से जुड़ी पहलें ग्रामीण महिलाओं के लिए आय के नए रास्ते खोल रही हैं. सरकार का जोर अब सिर्फ आर्थिक सहायता देने तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं को उद्यमिता, कौशल और बाजार से जोड़कर लंबे समय तक आत्मनिर्भर बनाने पर है. इससे महिला सशक्तिकरण को सामाजिक बदलाव और समृद्ध छत्तीसगढ़ के निर्माण से जोड़ने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं.



