CG News: जहां कभी था नक्सलियों का खौफ, वहां आज लहरा रहा तिरंगा, बस्तर के 92 गांवों में दिखी आजादी की नई तस्वीर
CG News: छत्तीसगढ़ के बस्तर में इस बार स्वतंत्रता दिवस का नजारा बेहद खास रहा, आजादी के बाद पहली बार संभाग के 92 ऐसे गांवों में सार्वजनिक रूप से स्वतंत्रता दिवस मनाया गया, जहां दशकों तक नक्सली हिंसा के कारण राष्ट्रीय पर्व आयोजित करना मुश्किल रहा था, इनमें बीजापुर के 33, सुकमा के 50 और नारायणपुर के 9 गांव शामिल हैं, इन गांवों में पूरे सम्मान और गर्व के साथ तिरंगा फहराया गया, यह आयोजन बस्तर में बदलते हालात और सामान्य जीवन की वापसी की बड़ी तस्वीर पेश करता है.

बस्तर में निकली तिरंगा यात्रा
नारायणपुर से शुरू हुई बस्तर तिरंगा यात्रा दंतेवाड़ा, सुकमा और बीजापुर से होते हुए कर्रेगुट्टा तक पहुंची, कभी माओवादियों के सुरक्षित ठिकाने माने जाने वाले इन इलाकों में अब तिरंगा शान से लहराता नजर आया, यात्रा का ताड़ापाला FOB में भव्य समापन हुआ, इस दौरान प्रदेश के गृहमंत्री विजय शर्मा, वनमंत्री, बस्तर सांसद, पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी, भाजपा कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक मौजूद रहे.
ताड़ापाला FOB में फहराया गया तिरंगा
ताड़ापाला FOB में गृहमंत्री विजय शर्मा ने ध्वजारोहण कर तिरंगा फहराया, करीब चार दशक तक हिंसा और भय से प्रभावित रहे इस इलाके में स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्रध्वज का फहराया जाना अपने आप में बड़ा बदलाव माना जा रहा है, गृहमंत्री ने कहा कि यह जीत जवानों, पुलिस, प्रशासन और बस्तर के हर नागरिक की जीत है, उन्होंने कहा कि माओवाद का दर्द भुलाया नहीं जा सकता, लेकिन अब बस्तर में डर की जगह उम्मीद और शांति का माहौल बन रहा है.
गौरना-मनकेली में बदली तस्वीर
बीजापुर जिला मुख्यालय से करीब 7 किलोमीटर दूर गौरना-मनकेली कभी माओवादियों के प्रभाव वाले प्रमुख इलाकों में गिना जाता था, वर्ष 2019 तक यहां राष्ट्रीय पर्व के दौरान काले झंडे का खौफ बताया जाता था, वर्ष 2024 में CRPF की तैनाती के बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत हुई, इसके बाद कार्रवाई, गिरफ्तारियों और आत्मसमर्पण के बीच माओवादी प्रभाव कमजोर होता गया, अब ग्रामीण पहले की तुलना में अधिक विश्वास के साथ राष्ट्रीय पर्व मना रहे हैं.
डर की जगह दिखी उम्मीद
80वें स्वतंत्रता दिवस पर गौरना-मनकेली में ग्रामीणों ने पूरे उत्साह के साथ तिरंगे को सम्मान दिया, कभी जिन इलाकों में राष्ट्रीय पर्व मनाना चुनौती माना जाता था, वहां आज राष्ट्रध्वज के नीचे लोग एकजुट नजर आए, बस्तर की यह तस्वीर सुरक्षा और प्रशासनिक बदलाव के साथ ग्रामीणों के बढ़ते विश्वास को भी दिखाती है, जहां कभी हिंसा और भय का माहौल था, वहां अब तिरंगा, विकास और लोकतंत्र की उम्मीद दिखाई दे रही है.
