CG News: छोटे शहर की बड़ी पहचान, विदेशी छात्रों को भा रहा खैरागढ़ का कला विश्वविद्यालय
CG News: छत्तीसगढ़ का छोटा शहर खैरागढ़ अब भारतीय संगीत और कला की दुनिया में नई पहचान बना रहा है. एशिया के पहले राजकुमारी इंदिरा सिंह संगीत एवं कला विश्वविद्यालय में पढ़ाई के लिए 23 देशों से 253 विदेशी विद्यार्थियों ने आवेदन किया है. नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए आए इन आवेदनों में भारतीय शास्त्रीय संगीत, लोकसंगीत और ललित कलाओं के प्रति बढ़ती रुचि दिखाई दे रही है.

17 विदेशी विद्यार्थियों को मिला प्रवेश
भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद की मंजूरी के बाद अब तक 17 विदेशी विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय में प्रवेश मिल चुका है. इनमें बांग्लादेश, श्रीलंका, फिजी और म्यांमार के छात्र शामिल हैं. विदेशी विद्यार्थियों ने लोकसंगीत, ग्राफिक्स, पेंटिंग, थियेटर, कत्थक, भरतनाट्यम और तबला जैसे विषयों को अपनी पढ़ाई के लिए चुना है.
इन कलाओं में दिखा सबसे ज्यादा आकर्षण
विदेशी विद्यार्थियों का सबसे अधिक रुझान भारतीय शास्त्रीय संगीत, लोकसंगीत, नृत्य और ललित कला की ओर बढ़ रहा है. खैरागढ़ जैसे छोटे शहर में स्थित विश्वविद्यालय की गुरु शिष्य परंपरा, अनुभवी शिक्षक, शांत वातावरण और कम खर्च में बेहतर शिक्षा की सुविधा विद्यार्थियों को आकर्षित कर रही है. अंतरराष्ट्रीय छात्रावास की सुविधा भी विदेशी छात्रों के लिए खास आकर्षण बनी हुई है.
पिछले साल भी बढ़ी थी विदेशी छात्रों की संख्या
पिछले शैक्षणिक सत्र में विश्वविद्यालय को 232 विदेशी आवेदन मिले थे, जिनमें से 22 विद्यार्थियों को प्रवेश दिया गया था. इन छात्रों ने लोकसंगीत, कत्थक, भरतनाट्यम, थियेटर और तबला जैसे विषयों में दाखिला लिया था. विश्वविद्यालय में विदेशी शोधार्थियों के लिए पीएचडी की सुविधा भी उपलब्ध है, जहां कई देशों के विद्यार्थी शोध कर चुके हैं.
विश्व स्तर पर बढ़ रही खैरागढ़ की पहचान
भारतीय संस्कृति, संगीत, नृत्य और कला को दुनिया तक पहुंचाने में खैरागढ़ विश्वविद्यालय लगातार महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. डॉ. लवली शर्मा ने बताया कि विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर सुविधाएं देने पर लगातार काम किया जा रहा है. विदेशी छात्रों की बढ़ती संख्या विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता और वैश्विक पहचान को मजबूत कर रही है.



