CG News: अबूझमाड़ की पारंपरिक फसलों को मिलेगी नई पहचान, पीला कोसरा, काला कोसरा और तिखुर के GI टैग की प्रक्रिया शुरू
CG News: छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के सुदूर वनांचल अबूझमाड़ की पारंपरिक कृषि और वन उपजों को अब राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने जा रही है. यहां के तीन प्रमुख उत्पाद पीला कोसरा, काला कोसरा और तिखुर को जीआई टैग दिलाने की आधिकारिक प्रक्रिया शुरू हो गई है. यह पहली बार है जब अबूझमाड़ जैसे दूरस्थ जनजातीय क्षेत्र की पारंपरिक फसलों को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है.
वैज्ञानिकों ने पारंपरिक फसलों पर किया शोध
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने अबूझमाड़ के जनजातीय समुदाय के खान-पान और स्वास्थ्य पर विशेष अध्ययन किया. शोध में सामने आया कि स्थानीय लोगों की बेहतर रोग प्रतिरोधक क्षमता का एक बड़ा आधार उनके दैनिक आहार में शामिल पारंपरिक मिलेट्स हैं. वैज्ञानिकों के अनुसार, पीला कोसरा, काला कोसरा और तिखुर में लो-ग्लाइसेमिक इंडेक्स पाया जाता है, जो स्वास्थ्य के लिए लाभदायक माना जाता है.
कच्चापाल और कुतुल में हुआ उत्पादों का अध्ययन
नारायणपुर जिले के पारंपरिक कृषि और वन उत्पादों को जीआई टैग दिलाने के लिए जिला प्रशासन की पहल पर काम शुरू किया गया है. इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों की टीम ने ओरछा विकासखंड के कच्चापाल और कुतुल गांवों का दौरा कर स्थानीय उत्पादों का अध्ययन किया. इस दौरान पीढ़ियों से संरक्षित लिटिल मिलेट की किस्मों और प्राकृतिक रूप से मिलने वाले तिखुर की विशेषताओं का दस्तावेजीकरण किया गया.
किसानों से जुटाई गई पारंपरिक जानकारी
वैज्ञानिकों ने इन उत्पादों की गुणवत्ता, पारंपरिक खेती की तकनीक, स्थानीय बीजों की विशेषता, उत्पादन प्रणाली और भौगोलिक परिस्थितियों का गहन अध्ययन किया. इसके साथ ही किसानों और ग्रामीणों से बातचीत कर इन फसलों से जुड़े पारंपरिक ज्ञान और संरक्षण की स्थानीय विधियों की जानकारी भी जुटाई गई. इससे अबूझमाड़ की कृषि विरासत को वैज्ञानिक आधार के साथ संरक्षित करने में मदद मिलेगी, जीआई टैग मिलने के बाद अबूझमाड़ के पीला कोसरा, काला कोसरा और तिखुर को बड़ा बाजार मिल सकेगा. इससे उत्पादों का मूल्य संवर्धन होगा और स्थानीय किसानों व ग्रामीणों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी. साथ ही जनजातीय समुदाय की पारंपरिक खेती, जैविक उत्पादन और वर्षों पुरानी सांस्कृतिक विरासत को भी संरक्षण मिलेगा.
अबूझमाड़ की सदियों पुरानी कृषि विरासत
पीला कोसरा अबूझमाड़ का एक पारंपरिक लघु धान्य है, जिसके पीले दाने पोषण और औषधीय गुणों से भरपूर माने जाते हैं. काला कोसरा एक पौष्टिक मिलेट है, जो स्थानीय आदिवासी समुदाय के भोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है. वहीं तिखुर हल्दी परिवार का प्राकृतिक कंद है, जिससे प्राप्त सफेद स्टार्च का उपयोग व्रत और गर्मियों में शरीर को ठंडक देने के लिए किया जाता है.
पारंपरिक उत्पादों को मिलेगी नई पहचान
अबूझमाड़ के इन पारंपरिक उत्पादों को जीआई टैग दिलाने की पहल न सिर्फ स्थानीय कृषि को बढ़ावा देगी, बल्कि क्षेत्र की पहचान को भी मजबूत करेगी. वैज्ञानिकों, प्रशासन और स्थानीय समुदाय के संयुक्त प्रयास से इन उत्पादों को देश-दुनिया के बाजार तक पहुंचाने की तैयारी की जा रही है. यह कदम जनजातीय संस्कृति और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है.



