CG News: छत्तीसगढ़ में अतिथि व्याख्याताओं के लिए नई नीति लागू, अब प्रतिदिन 2,000 रुपए मानदेय, पीएचडी और मातृत्व अवकाश का भी प्रावधान
CG News: छत्तीसगढ़ सरकार ने उच्च शिक्षा संस्थानों में पढ़ाई और शैक्षणिक गतिविधियों को बेहतर बनाने के लिए अतिथि व्याख्याताओं की संशोधित नीति 2026 लागू कर दी है. नई व्यवस्था में नियुक्ति प्रक्रिया, मानदेय, योग्यता, कार्यदायित्व और अवकाश संबंधी नियमों को स्पष्ट किया गया है. सरकार का उद्देश्य कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाना है.
एक आवेदन से होगी नियुक्ति प्रक्रिया
नई नीति के अनुसार, यदि किसी कॉलेज में एक ही विषय के प्राध्यापक, सह-प्राध्यापक और सहायक प्राध्यापक के पद रिक्त हैं, तो अभ्यर्थी को केवल एक आवेदन देना होगा. चयन संबंधित विषय की मेरिट सूची के आधार पर किया जाएगा, जिससे भर्ती प्रक्रिया अधिक सरल और पारदर्शी बनेगी.
रोजाना 2,000 रुपए तक मिलेगा मानदेय
संशोधित नीति में अतिथि व्याख्याताओं के मानदेय में भी स्पष्ट व्यवस्था की गई है. अतिथि व्याख्याताओं को प्रति कार्यदिवस 2,000 रुपए, अधिकतम 50,000 रुपए प्रतिमाह तक भुगतान किया जाएगा. अतिथि ग्रंथपाल और क्रीड़ा अधिकारी को 1,600 रुपए प्रतिदिन, अधिकतम 40,000 रुपए मासिक मिलेंगे. वहीं, अतिथि शिक्षण सहायकों को 1,400 रुपए प्रतिदिन और ग्रंथालय या क्रीड़ा सहायकों को 1,200 रुपए प्रतिदिन, निर्धारित मासिक सीमा के साथ मानदेय दिया जाएगा.
योग्यता और अनुभव के नए नियम
शिक्षण, ग्रंथालय और क्रीड़ा सहायकों के लिए स्नातकोत्तर में सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों को कम से कम 55 प्रतिशत और आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को 50 प्रतिशत अंक अनिवार्य होंगे. इसके अलावा, अनुभव प्रमाण पत्र तभी जारी किया जाएगा, जब कोई अतिथि शिक्षक एक शैक्षणिक सत्र में कम से कम पांच महीने तक सेवाएं देगा.
सिर्फ पढ़ाई नहीं, अन्य जिम्मेदारियां भी निभानी होंगी
अतिथि व्याख्याताओं की भूमिका केवल कक्षा तक सीमित नहीं रहेगी. उन्हें प्रवेश प्रक्रिया, परीक्षा संचालन, नैक मूल्यांकन, छात्रसंघ चुनाव, खेलकूद प्रतियोगिताओं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों सहित विभिन्न शैक्षणिक गतिविधियों में भी सहयोग करना होगा, नई नीति के तहत सभी अतिथि कर्मियों के लिए प्रतिदिन सात घंटे कार्य करना अनिवार्य होगा. प्रत्येक शिक्षण सत्र में 11 सवेतन अवकाश दिए जाएंगे. वहीं, पीएचडी कोर्स वर्क या शोध कार्य के लिए अवैतनिक अवकाश की सुविधा मिलेगी. महिला अतिथि कर्मियों को 180 दिनों तक मातृत्व अवकाश भी उपलब्ध कराया जाएगा, हालांकि यह अवैतनिक रहेगा.
व्यवस्था मजबूत करने की कोशिश
छत्तीसगढ़ के कई सरकारी कॉलेज और विश्वविद्यालय लंबे समय से नियमित शिक्षकों की कमी का सामना कर रहे हैं. ऐसे में सरकार की यह नई नीति अतिथि व्याख्याताओं की नियुक्ति, सेवा शर्तों और कार्यप्रणाली को एक समान बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है. हालांकि, यह व्यवस्था नियमित नियुक्तियों का विकल्प नहीं है, बल्कि शिक्षण कार्य को सुचारू बनाए रखने के लिए एक अंतरिम समाधान के रूप में लागू की गई है.
