CG News: रायपुर में E20 पेट्रोल विवाद, कंज्यूमर कोर्ट का बड़ा फैसला, नई कार या 20.5 लाख लौटाने का आदेश
CG News: देशभर में E20 यानी 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जा रहा है. इसी बीच रायपुर से E20 पेट्रोल से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है. कंज्यूमर कोर्ट ने मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड और उसके अधिकृत डीलर को उपभोक्ता सेवा में कमी का जिम्मेदार मानते हुए ग्राहक के पक्ष में फैसला सुनाया है, कोर्ट ने आदेश दिया है कि कंपनी 45 दिनों के भीतर ग्राहक को उसी मॉडल की नई E20 अनुकूल कार उपलब्ध कराए. यदि ऐसा नहीं किया जाता है, तो कंपनी को करीब 20.5 लाख रुपये की वाहन कीमत के साथ अन्य खर्च और मुआवजा भी देना होगा.

देश का पहला E20 मुआवजा मामला
बताया जा रहा है कि E20 पेट्रोल से वाहन खराब होने पर उपभोक्ता को राहत देने का यह देश का पहला मामला है. आयोग ने माना कि जिस कार की बिक्री की गई, उसका इंजन E20 ईंधन के अनुरूप नहीं था, फिर भी उसे ग्राहक को बेच दिया गया.
कार खरीदने के कुछ महीने बाद आई परेशानी
शिकायतकर्ता डॉ. प्रेमराज देबता ने जून 2024 में रायपुर की नेक्सा डीलरशिप से मारुति सुजुकी ग्रैंड विटारा स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड जेटा प्लस खरीदी थी. उनका कहना है कि खरीदारी के समय डीलर ने कार का निर्माण दिसंबर 2023 का बताया था, जबकि बाद में रिकॉर्ड में उसका निर्माण जनवरी 2023 का पाया गया, करीब पांच महीने बाद कार के डैशबोर्ड पर इंजन खराब होने का अलर्ट आया और वाहन बीच रास्ते में बंद हो गया.

बार-बार खराब होती रही कार
डीलरशिप ने शुरुआत में खराबी की वजह मिलावटी पेट्रोल बताई और फ्यूल टैंक की सफाई कराई. जांच के दौरान टैंक से सफेद परत जैसा पदार्थ मिला. बाद में पेट्रोल पंप की जांच में ईंधन को मानकों के अनुरूप बताया गया, इसके बावजूद कार बार-बार खराब होती रही. बाद में इंजन पूरी तरह बंद हो गया और कंपनी ने इंजन बदलने के लिए करीब 5.30 लाख रुपये का खर्च बताया, जिसे वारंटी में शामिल करने से इनकार कर दिया.
सरकारी लैब की रिपोर्ट में क्या मिला
ईंधन के नमूनों की जांच एसजीएस लैब में कराई गई. रिपोर्ट में पेट्रोल में एथेनॉल की मौजूदगी की पुष्टि हुई. जांच में पाया गया कि पेट्रोल के निचले हिस्से में एथेनॉल सफेद परत के रूप में अलग होकर जमा हो गया था, आयोग ने रिपोर्ट के आधार पर माना कि वाहन का इंजन E20 ईंधन के अनुरूप नहीं था, जबकि ग्राहक को ऐसा वाहन बेचा गया.
कोर्ट ने दिया यह आदेश
14 जुलाई 2026 को उपभोक्ता फोरम ने अपने फैसले में कहा कि यदि कंपनी 45 दिनों के भीतर नई E20 अनुकूल कार उपलब्ध नहीं कराती है, तो उसे वाहन की कीमत करीब 20.5 लाख रुपये लौटानी होगी, इसके अलावा आरटीओ पंजीकरण शुल्क, बीमा, अन्य खर्च, मानसिक प्रताड़ना के लिए 1 लाख रुपये और मुकदमे का खर्च 10 हजार रुपये भी अदा करना होगा, ऑटो विशेषज्ञ के. महेश कुमार के अनुसार, यदि एथेनॉल में नमी होती है, तो वह पेट्रोल में समान रूप से नहीं घुल पाता. दोनों की घनत्व अलग होने के कारण ईंधन अलग हो सकता है, जिससे फ्यूल पंप और फ्यूल सिस्टम के अन्य हिस्सों पर असर पड़ने की संभावना रहती है.
मारुति सुजुकी का पक्ष
मारुति सुजुकी इंडिया के कॉर्पोरेट अफेयर्स के सीनियर एग्जीक्यूटिव ऑफिसर राहुल भारती ने कहा कि E20 ईंधन को लेकर लोगों में कुछ शंकाएं हैं, खासकर उन वाहनों को लेकर जिनका निर्माण 2023 से पहले हुआ था, उन्होंने कहा कि कंपनी के अनुसार, 2023 से पहले निर्मित और बेची गई कारों में भी E20 ईंधन के उपयोग को ध्यान में रखते हुए पर्याप्त सुरक्षा मानक अपनाए गए हैं. कंपनी का दावा है कि ऐसे वाहनों में E20 ईंधन के इस्तेमाल से सामान्य परिस्थितियों में घिसाव, जंग या वाहन की आयु पर कोई नुकसानदायक प्रभाव नहीं पड़ता.


