CG News: मंत्री लखनलाल देवांगन की मौजूदगी में वर्ष 2026-27 की विकास कार्ययोजना को मिली मंजूरी
CG News: कोरबा जिले के खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास को नई दिशा देने के लिए जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) की शासी परिषद की अहम बैठक आयोजित की गई। बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए विभिन्न विकास कार्यों की कार्ययोजना को मंजूरी दी गई। बैठक में वाणिज्य, उद्योग एवं श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

शिक्षा, स्वास्थ्य और पेयजल पर बड़ा फोकस
मंत्री लखनलाल देवांगन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच के अनुसार DMF योजना खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास का मजबूत माध्यम बनी है। कोरबा जिले में इस फंड से शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क और अधोसंरचना विकास के कार्य तेजी से किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आम लोगों को जल्द लाभ मिले, इसके लिए सभी स्वीकृत कार्य समय-सीमा में पूरे होने चाहिए।
निर्माण कार्यों की होगी डिजिटल मॉनिटरिंग
बैठक में बताया गया कि जिले में निर्माण पोर्टल शुरू किया गया है, जिसके जरिए सभी परियोजनाओं की रियल-टाइम मॉनिटरिंग की जाएगी। आम नागरिक भी इस पोर्टल के माध्यम से DMF कार्यों की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। अधिकारियों को निर्माण गुणवत्ता बनाए रखने और नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए गए।
सर्वे से तय होगा विकास का रोडमैप
कलेक्टर कुणाल दुदावत ने बताया कि जिले के 5 विकासखंडों के 782 गांवों में व्यापक बेसलाइन सर्वे कराया जा रहा है। इसके आधार पर अगले पांच वर्षों की विकास योजना तैयार की जाएगी ताकि खनन प्रभावित क्षेत्रों में जरूरत के अनुसार विकास कार्य किए जा सकें, बैठक में जानकारी दी गई कि शिक्षा क्षेत्र के लिए 255 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है। इसके तहत 16 पीएम श्री स्कूलों में वर्चुअल रियलिटी लैब स्थापित की जाएगी और छात्रों को NEET-JEE की आवासीय कोचिंग भी उपलब्ध कराई जाएगी।
सुविधाओं को भी मिलेगा विस्तार
स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए 67 करोड़ रुपये से मोबाइल मेडिकल यूनिट और एम्बुलेंस सेवाएं बढ़ाई जाएंगी। वहीं पेयजल संकट दूर करने के लिए 150 नए ट्यूबवेल और सोलर पंप लगाए जाएंगे। पर्यावरण संरक्षण के लिए ग्रीन बेल्ट और एंटी-स्मॉग गन पर भी जोर दिया जाएगा, बैठक में सांसद ज्योत्सना महंत समेत अन्य जनप्रतिनिधियों ने कहा कि DMF फंड का उपयोग पूरी पारदर्शिता और गुणवत्ता के साथ होना चाहिए ताकि खनन प्रभावित क्षेत्रों को वास्तविक लाभ मिल सके।



