CG News: स्वरोजगार की मिसाल: समूह सहयोग से आत्मनिर्भर बनीं उमा सिंह, बनीं ‘लखपति दीदी’
CG News: छत्तीसगढ़ में स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत किया जा रहा है।

ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा
बलरामपुर जिले के जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम महाराजगंज की निवासी उमा सिंह आज अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बनकर उभरी हैं। वे गुलाब महिला स्व-सहायता समूह की सक्रिय सदस्य हैं और समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने अपने जीवन में आर्थिक बदलाव की नई शुरुआत की, समूह से जुड़ने के बाद उमा सिंह को चक्रीय निधि, सामुदायिक निवेश कोष और बैंक लिंकेज के माध्यम से लगभग 85 हजार रुपये का ऋण प्राप्त हुआ। इस राशि का उपयोग उन्होंने कृषि, मत्स्य पालन और छोटे व्यवसाय को बढ़ाने में किया, जिससे उनकी आय के नए स्रोत विकसित हुए।
खेती और मछली पालन से बढ़ी आय
उमा सिंह ने 2.5 एकड़ भूमि में धान और 1.5 एकड़ में मक्का की खेती की। इसके साथ ही उन्होंने अपनी डबरी में मछली पालन शुरू किया, जिससे अतिरिक्त आय प्राप्त हुई।
उनकी वार्षिक आय के मुख्य स्रोत इस प्रकार रहे:
• धान बिक्री से लगभग 1 लाख 42 हजार रुपये
• मक्का से लगभग 16 हजार रुपये
• मछली पालन से लगभग 20 हजार रुपये
इसके अलावा वे प्रतिदिन शाम को चना-चाट की दुकान भी चलाती हैं, जिससे उन्हें नियमित आय प्राप्त होती है।
बनीं ‘लखपति दीदी’
विभिन्न आजीविका गतिविधियों के जरिए उमा सिंह ने आर्थिक आत्मनिर्भरता हासिल की है और अब वे अपने गांव में “लखपति दीदी” के रूप में जानी जाती हैं। उनकी सफलता ने ग्रामीण महिलाओं के लिए एक नया उदाहरण पेश किया है।
अन्य महिलाओं को मिल रही प्रेरणा
उमा सिंह की सफलता से प्रेरित होकर आसपास के गांवों की कई महिलाएं भी स्वयं सहायता समूहों से जुड़ रही हैं। वे उन्नत खेती, पशुपालन, मत्स्य पालन और छोटे व्यवसायों को अपनाकर अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।


