Special Story: छत्तीसगढ़ का ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल तुरतुरिया, लव-कुश की जन्मस्थली और गोमुखी झरने का है अद्भुत संगम
Special Story: छत्तीसगढ़ राज्य में धार्मिक आस्था, ऐतिहासिक मान्यताओं और प्राकृतिक सुंदरता का अनूठा संगम देखने को मिलता है, बलौदाबाजार जिले के कसडोल विकासखंड से लगभग 22 किलोमीटर की दूरी पर सिरपुर मार्ग पर स्थित तुरतुरिया एक बेहद प्रसिद्ध और पवित्र स्थल है, यह क्षेत्र चारों तरफ से घने जंगलों, ऊंची पहाड़ियों और प्राकृतिक छटा से घिरा हुआ है, यहां पहाड़ी की ऊंचाई पर संतानदात्री माता पहाड़ावाली का भव्य धाम स्थित है, जबकि नीचे की तरफ महर्षि वाल्मीकि का ऐतिहासिक आश्रम मौजूद है, ऐसी गहरी मान्यता है कि यहां सच्चे दिल से संतान प्राप्ति की मुराद लेकर आने वाले श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं अवश्य पूरी होती हैं, इसके अलावा बारहमासी गोमुखी प्राकृतिक झरना और राम वन गमन पथ से जुड़ाव इस स्थान को धार्मिक पर्यटन के नक्शे पर बेहद खास बनाता है.

संतानदात्री माता पहाड़ावाली का दरबार
तुरतुरिया की सबसे बड़ी पहचान यहां पहाड़ी पर विराजमान माता पहाड़ावाली के प्राचीन मंदिर से है, जहां माता को मां काली के स्वरूप में पूजा जाता है और स्थानीय परंपराओं के अनुसार उन्हें संतानदात्री देवी माना जाता है, नि:संतान दंपति दूर-दूर से अपनी झोली भरने की आस लेकर माता के दरबार में पहुंचते हैं, मन्नत पूरी होने के बाद भक्तगण दोबारा यहां पहुंचकर अपनी श्रद्धा अर्पित करते हैं, इस पवित्र धाम में चैत्र और शारदीय दोनों ही नवरात्र पर्वों के दौरान विशेष धार्मिक अनुष्ठान और आयोजन किए जाते हैं, इस वर्ष शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर यहां लगभग 1500 ज्योति कलश प्रज्वलित किए गए थे, जिनकी देखरेख और व्यवस्था जनपद पंचायत द्वारा नियुक्त पुजारियों द्वारा की जाती है, इन दिनों पूरा परिसर भक्तिमय माहौल में डूबा रहता है.

लव-कुश की जन्मस्थली
धार्मिक और पौराणिक इतिहास की दृष्टि से भी तुरतुरिया का विशेष और अद्वितीय महत्व है, इसे भगवान श्रीराम और माता सीता के वीर पुत्रों लव और कुश की जन्मस्थली के रूप में पूरी दुनिया में जाना जाता है, यहां स्थित महर्षि वाल्मीकि का आश्रम इस प्राचीन मान्यता से जुड़ा सबसे प्रमुख प्रमाण है, घने जंगलों और शांत वादियों के बीच स्थित यह आश्रम देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को एक गहरा आध्यात्मिक अनुभव कराता है, यहां आने वाले सैलानी प्राकृतिक खूबसूरती के साथ-साथ इस स्थान से जुड़ी रामायण कालीन पौराणिक कथाओं को जानने में विशेष रुचि रखते हैं, जो इसे छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक और पौराणिक विरासत का एक अमूल्य हिस्सा बनाती है.
बारहमासी गोमुखी झरना
तुरतुरिया की प्राकृतिक सुंदरता यहां आने वाले हर पर्यटक का मन मोह लेती है, यहां स्थित गोमुखी प्राकृतिक झरना इस क्षेत्र का सबसे बड़ा मुख्य आकर्षण है, स्थानीय मान्यताओं और भौगोलिक स्थिति के अनुसार यह झरना साल के बारह महीने निरंतर बहता रहता है, इस झरने से पानी के बहने के दौरान ‘तुरतुर’ जैसी विशेष आवाज निकलती है, और कहा जाता है कि इसी अनूठी आवाज के कारण इस पावन स्थल का नाम तुरतुरिया पड़ा है, चारों तरफ फैली हरियाली, कल-कल बहता पानी और शांत वातावरण पर्यटकों को मानसिक सुकून देता है, राम वन गमन परिपथ (पथ) में शामिल किए जाने के बाद से इस ऐतिहासिक स्थल का महत्व और अधिक बढ़ गया है, जिससे यहां सालभर पर्यटकों और श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है.

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