Karwa Chauth 2026: छत्तीसगढ़ में कब दिखेगा चांद, बादल बने बाधा तो कैसे करें व्रत का पारण?
Karwa Chauth 2026: छत्तीसगढ़ समेत देशभर में करवाचौथ का पर्व मनाया जा रहा है. इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ निर्जला व्रत रखती हैं. शाम को चंद्रमा को अर्घ्य देने और पूजा करने के बाद व्रत खोला जाता है. हालांकि, इस बार चक्रवात अर्नब के प्रभाव से प्रदेश के कई इलाकों में बादल और बारिश की संभावना जताई गई है. ऐसे में निर्धारित समय पर चांद निकलने के बावजूद उसके दर्शन में परेशानी हो सकती है.

रायपुर समेत इन शहरों में चंद्रोदय का संभावित समय
छत्तीसगढ़ के अलग-अलग शहरों में चंद्रमा के निकलने का समय अलग-अलग हो सकता है. उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बलरामपुर में रात 8:02 बजे, अंबिकापुर में 8:03 बजे और कोरबा में 8:06 बजे चंद्रोदय का अनुमान है. राजधानी रायपुर में रात 8:18 बजे चांद निकलने की संभावना जताई गई है. वहीं, जगदलपुर में रात 8:17 से 8:22 बजे के बीच चंद्रमा के दर्शन हो सकते हैं. बादलों की मौजूदगी के कारण वास्तविक दर्शन में देरी हो सकती है.

शहरवार चंद्रोदय का समय
• बलरामपुर – रात 8:02 बजे
• अंबिकापुर – रात 8:03 बजे
• कोरबा – रात 8:06 बजे
• जगदलपुर – रात 8:17 से 8:22 बजे
• रायपुर – रात 8:18 बजे

बादलों के कारण चांद नहीं दिखे तो क्या करें?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चंद्रोदय और चंद्र दर्शन अलग-अलग स्थितियां हैं. यदि निर्धारित समय पर बादलों के कारण चंद्रमा दिखाई नहीं देता, तो व्रत खोलने की विधि को लेकर अलग-अलग परंपराएं प्रचलित हैं. ऐसी स्थिति में महिलाएं अपने परिवार की परंपरा, पूजा विधि और स्थानीय विद्वान की सलाह के अनुसार निर्णय ले सकती हैं.
भगवान शिव के मस्तक पर विराजमान चंद्रमा का ध्यान
धार्मिक मान्यता है कि भगवान शिव के मस्तक पर चंद्रमा विराजमान हैं. चांद दिखाई नहीं देने की स्थिति में कुछ लोग भगवान शिव की पूजा करते हैं और चंद्रदेव का ध्यान करते हैं. इसके लिए घर या मंदिर में दीपक जलाकर पूजा की जा सकती है. हालांकि, इसे चंद्र दर्शन का सार्वभौमिक विकल्प नहीं माना जाना चाहिए, क्योंकि अलग-अलग समुदायों और परिवारों में व्रत खोलने की परंपराएं अलग हो सकती हैं.

चांदी के सिक्के या चंद्रमा के प्रतीक से पूजा
कुछ धार्मिक परंपराओं में चांदी को चंद्रदेव से संबंधित माना जाता है. ऐसी मान्यता का पालन करने वाले लोग चांदी के सिक्के को प्रतीक मानकर रोली और अक्षत से पूजा कर सकते हैं. कुछ परिवार चावल से चंद्रमा की आकृति बनाकर भी पूजा करते हैं. इन विधियों को अपनाने से पहले अपने परिवार की प्रचलित परंपरा के अनुसार पूजा करना उचित रहेगा.

चांद की दिशा में अर्घ्य देने को लेकर क्या मान्यता है?
यदि चंद्रमा बादलों में छिपा हो, तो कुछ लोग स्थानीय चंद्रोदय के समय चंद्रमा की संभावित दिशा की ओर मुख करके प्रार्थना और अर्घ्य देते हैं. वहीं, कुछ परिवार चांद दिखाई देने तक प्रतीक्षा करना पसंद करते हैं. करवाचौथ की पूजा में परंपरा का विशेष महत्व होता है, इसलिए व्रत के पारण को लेकर असमंजस होने पर परिवार के बुजुर्गों या विश्वसनीय धार्मिक मार्गदर्शक से सलाह ली जा सकती है.


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