CG News: रायपुर केंद्रीय जेल में प्रदेश की पहली ‘महिला ओपन जेल’ का शुभारंभ, ब्यूटी पार्लर और सिलाई केंद्र में काम करेंगी बंदिनी
CG News: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित केंद्रीय जेल में राज्य की पहली महिला खुली जेल (Women Open Correctional Institution – O.C.I.) का ऐतिहासिक शुभारंभ किया गया है. इस विशेष सुधारात्मक संस्थान का उद्घाटन जेल महानिदेशक (DG Jail) हिमांशु गुप्ता के कर-कमलों द्वारा किया गया. राज्य में महिला कैदियों के सुधार, सामाजिक पुनर्वास और आत्मनिर्भरता की दिशा में इस व्यवस्था को एक बड़ा और प्रगतिशील कदम माना जा रहा है.

पुनर्वास और स्वावलंबन पर विशेष जोर
ओपन जेल के उद्घाटन के अवसर पर जेल अधीक्षक योगेश सिंह क्षत्री और महिला ओपन जेल प्रभारी खुशबू मिश्रा समेत जेल विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित रहे. अधिकारियों ने बताया कि छत्तीसगढ़ में पहली बार महिला कैदियों के लिए इस प्रकार की खुली जेल की व्यवस्था शुरू की गई है. इसके निर्माण और संचालन के लिए रायपुर जेल परिसर में पहले से उपलब्ध बुनियादी ढांचे (Infrastructure) का ही कुशल उपयोग किया गया है.
सुबह काम पर निकलेंगी और शाम को वापस लौटेंगी महिला कैदी
शुरुआती चरण में इस महिला ओपन जेल में 25 सजायाफ्ता महिला बंदियों को रखा जाएगा. इस प्रणाली की खास बात यह है कि इसमें चयनित महिला बंदिनी सुबह अपने तय काम पर जाने के लिए जेल की चारदीवारी से बाहर निकल सकेंगी. दिनभर आत्मनिर्भरता से जुड़े विभिन्न कार्य पूरे करने के बाद, शाम को जेल के दैनिक लॉकअप समय से पहले उन्हें परिसर में वापस आना अनिवार्य होगा.
ब्यूटी पार्लर, सिलाई केंद्र और बिक्री केंद्र में मिलेगा रोजगार
जेल की ऊंची दीवारों से बाहर मंदिर के पास स्थित परिसर में महिला बंदियों के लिए रोजगार की विशेष व्यवस्था की गई है. उन्हें सिलाई सेंटर, ब्यूटी पार्लर और जेल में तैयार होने वाले उत्पादों के बिक्री केंद्र (Sales Center) में काम करने का अवसर दिया जाएगा. इसके अलावा, आने वाले समय में उनकी रुचि और कौशल के अनुसार रोजगार के अन्य वैकल्पिक साधन भी उपलब्ध कराए जाएंगे ताकि वे आर्थिक रूप से सक्षम बन सकें.
समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की अनूठी पहल
जेल प्रशासन की इस पहल का मुख्य उद्देश्य सजा काट रही महिलाओं में आत्मसम्मान जगाना और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है. ओपन जेल से मिलने वाली व्यावहारिक स्वतंत्रता और रोजगार के अवसरों से महिला बंदियों में सकारात्मक बदलाव आएगा. सजा पूरी होने के बाद जब वे बाहर निकलेंगी, तो उनके पास जीवन यापन के लिए कौशल और साधन उपलब्ध होंगे, जिससे वे एक बेहतर और सम्मानीय जीवन जी सकेंगी.


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