CG News: 10वीं से शुरू हुआ सांपों को बचाने का जुनून, सरगुजा के ‘स्नेक मैन’ सत्यम ने रेस्क्यू किए 10 हजार से ज्यादा सांप
CG News: सरगुजा संभाग मुख्यालय अंबिकापुर के सत्यम कुमार द्विवेदी को इलाके में ‘स्नेक मैन’ के नाम से जाना जाता है. घर, कुएं, नाली या किसी दूसरे स्थान पर सांप निकलने की जानकारी मिलते ही कई लोग सबसे पहले सत्यम से संपर्क करते हैं. हाई स्कूल के दिनों से जीव-जंतुओं के प्रति उनका लगाव बढ़ता गया और उन्होंने सांपों के संरक्षण व रेस्क्यू को अपनी जिंदगी का हिस्सा बना लिया. अब तक वे 10 हजार से ज्यादा सांपों का सुरक्षित रेस्क्यू कर चुके हैं. साथ ही वे वन्यजीवों के लिए अपना रेस्क्यू सेंटर शुरू करने का सपना भी देख रहे हैं.

जुनून ने बना दिया रेस्क्यू एक्सपर्ट
सत्यम बताते हैं कि इस काम की शुरुआत के समय उन्हें सांपों के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी. 10वीं के बाद वे आईआईटी की कोचिंग के लिए रायपुर गए, लेकिन इसी दौरान जीव-जंतुओं के प्रति उनकी रुचि और गहरी होती गई. शुरुआत में उन्होंने खुद अध्ययन किया, किताबों और ऑनलाइन संसाधनों से जानकारी जुटाई और बाद में प्रशिक्षण लेकर रेस्क्यू की बारीकियां सीखीं. समय के साथ अनुभव बढ़ा और वे सांपों के व्यवहार तथा सुरक्षित रेस्क्यू की तकनीक को बेहतर तरीके से समझने लगे. वर्तमान में वे एलएलबी की पढ़ाई के साथ अपने इस अभियान को भी जारी रखे हुए हैं.
दोस्त के घर से शुरू हुआ पहला रेस्क्यू
सत्यम के मुताबिक उनका पहला रेस्क्यू लॉकडाउन से पहले हुआ था. उनके एक दोस्त के घर सांप निकल आया था और दोस्तों को पता था कि सत्यम को जीव-जंतुओं से खास लगाव है. उस समय उनकी उम्र कम थी और रेस्क्यू का अनुभव भी सीमित था, लेकिन सांप को बचाने की इच्छा ने डर पर काबू पा लिया. उन्होंने सांप को सुरक्षित तरीके से पकड़ा और उसके प्राकृतिक वातावरण में छोड़ दिया. इसके बाद धीरे-धीरे लोगों को उनके काम की जानकारी होने लगी और रेस्क्यू के मामले बढ़ते गए. वे स्पेक्टेकल्ड कोबरा, कॉमन करैत, रसेल वाइपर सहित कई प्रजातियों का रेस्क्यू कर चुके हैं. जयनगर में कुएं से दुर्लभ एल्बिनो कॉमन करैत का रेस्क्यू भी उनके यादगार अभियानों में शामिल है.
सांप और इंसान दोनों की सुरक्षा सबसे जरूरी
सत्यम का कहना है कि सांपों का रेस्क्यू केवल साहस का काम नहीं, बल्कि सही जानकारी और सावधानी की भी जरूरत होती है. शुरुआत में वे कई बार बिना उपकरण के रेस्क्यू कर लेते थे, लेकिन प्रशिक्षण और अनुभव के बाद उन्होंने सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल शुरू किया. वे रसेल वाइपर को सबसे चुनौतीपूर्ण प्रजातियों में मानते हैं, क्योंकि यह आक्रामक हो सकता है और इसका विष गंभीर असर डाल सकता है. सत्यम लोगों को सलाह देते हैं कि केवल शौक या वीडियो देखकर सांप पकड़ने की कोशिश न करें. उचित प्रशिक्षण, सुरक्षा और वन विभाग के साथ समन्वय जरूरी है, क्योंकि छोटी सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है.
24 घंटे के वन्यजीव रेस्क्यू सेंटर का है सपना
सत्यम के अनुसार जंगलों में कमी, जमीन की प्लॉटिंग और जेसीबी से होने वाली खुदाई के कारण सांपों का प्राकृतिक आवास प्रभावित हो रहा है. भोजन और सुरक्षित ठिकाने की तलाश में कई सांप रिहायशी इलाकों तक पहुंच जाते हैं. उनका सपना अब सरगुजा में एक आधुनिक रेस्क्यू और पुनर्वास केंद्र स्थापित करने का है, जहां घायल वन्यजीवों को तत्काल उपचार, आश्रय और जरूरी देखभाल मिल सके. वे चाहते हैं कि यह केंद्र 24 घंटे उपलब्ध हो और सिर्फ सांपों ही नहीं, बल्कि दूसरे घायल वन्यजीवों के लिए भी मददगार बने. सत्यम का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल सांपों को पकड़ना नहीं, बल्कि इंसानों और वन्यजीवों के बीच सुरक्षित सह-अस्तित्व की दिशा में काम करना है.

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