CG News: राष्ट्रपति भवन में नुआखाई पर्व को मिला सम्मान, गांड़ा महासमाज ने राष्ट्रपति मुर्मु का जताया आभार
CG News: गोंड-गांड़ा, ओड़िया और जनजातीय समुदायों की सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़े प्रमुख लोकपर्व नुआखाई को राष्ट्रपति भवन में स्थान मिलने पर राष्ट्रीय गांड़ा महासमाज ने प्रसन्नता जताई है. समाज ने इसके लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के प्रति आभार व्यक्त किया. महासमाज के संस्थापक अधिवक्ता भगवानू नायक ने इसे लोक-संस्कृति के लिए गौरव का अवसर बताया.

लोकपर्व का सम्मान, समुदायों के लिए गौरव
भगवानू नायक ने कहा कि देश के सर्वोच्च संवैधानिक संस्थान राष्ट्रपति भवन में नुआखाई जैसे लोकपर्व और लोकसंस्कृति को सम्मान मिलना उन लोगों के लिए गौरव की बात है, जो लंबे समय से प्रकृति, कृषि, श्रम और सामुदायिक जीवन से जुड़ी परंपराओं को आगे बढ़ा रहे हैं. उनके अनुसार यह सम्मान सिर्फ एक पर्व तक सीमित नहीं है, बल्कि अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े समुदायों के योगदान को भी सामने लाता है.
राष्ट्रपति भवन विविधता में एकता का प्रतीक
राष्ट्रीय गांड़ा महासमाज के संस्थापक ने राष्ट्रपति भवन को संविधान, लोकतंत्र और विविधता में एकता का राष्ट्रीय प्रतीक बताया. उन्होंने कहा कि वहां अलग-अलग समुदायों की लोक-संस्कृति को स्थान मिलना सांस्कृतिक समावेश का संदेश देता है. उनके मुताबिक भारत की सांस्कृतिक विरासत गांवों, खेतों, जंगलों और स्थानीय समुदायों की परंपराओं में भी दिखाई देती है, जिन्हें पीढ़ियों से संरक्षित किया जा रहा है.
युवा पीढ़ी को संस्कृति से जुड़ने की उम्मीद
भगवानू नायक ने कहा कि राष्ट्रपति भवन की ओर से आम नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने और वंचित एवं पिछड़े वर्गों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है. उनके अनुसार नुआखाई जैसे लोकपर्व को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिलने से आदिवासी और पिछड़े समुदायों में अपनी संस्कृति के प्रति गर्व बढ़ सकता है. साथ ही युवा पीढ़ी को अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने की प्रेरणा मिलने की उम्मीद है.
गांड़ा समाज की लोककला को भी राष्ट्रीय मंच की उम्मीद
राष्ट्रीय गांड़ा महासमाज ने भविष्य में राष्ट्रपति भवन में गांड़ा समाज के लोकपर्वों, लोककलाओं, लोकवाद्यों और सांस्कृतिक विरासत को भी राष्ट्रीय मंच मिलने की अपेक्षा जताई है. भगवानू नायक ने नुआखाई लोक-संस्कृति को मिले सम्मान के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के प्रति महासमाज की ओर से आभार व्यक्त किया. उन्होंने उम्मीद जताई कि देश की विविध लोकपरंपराओं को आगे भी ऐसे मंचों पर स्थान मिलता रहेगा.
