CG News: छत्तीसगढ़ में धान खरीदी की नई व्यवस्था लागू, बायोमेट्रिक सत्यापन और एग्रीस्टैक पंजीयन हुआ अनिवार्य
CG News: छत्तीसगढ़ में आगामी धान खरीदी सीजन को लेकर राज्य सरकार ने किसानों के लिए एक नई और सख्त व्यवस्था लागू करने का फैसला लिया है. प्रदेश में इस बार धान खरीदी का कार्य 15 नवंबर से शुरू होकर 31 जनवरी 2027 तक संचालित किया जाएगा. खरीदी प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने और फर्जीवाड़े को रोकने के उद्देश्य से इस बार धान बेचते समय किसानों या उनके द्वारा अधिकृत नॉमिनी का बायोमेट्रिक सत्यापन (फिंगरप्रिंट) अनिवार्य कर दिया गया है, यानी अब सिर्फ मोबाइल ओटीपी के जरिए सत्यापन करके धान नहीं बेचा जा सकेगा.

नॉमिनी का भी बायोमेट्रिक सत्यापन होगा जरूरी
नई व्यवस्था के अंतर्गत खरीदी केंद्र पर किसान को स्वयं उपस्थित होकर अपने अंगूठे का निशान देना होगा. हालांकि, यदि कोई किसान किसी अपरिहार्य कारण या अस्वस्थता की वजह से केंद्र तक पहुँचने में असमर्थ रहता है, तो वह अपने अधिकृत नॉमिनी के माध्यम से अपनी उपज बेच सकेगा. इसके लिए शर्त यह रखी गई है कि संबंधित समिति के आधिकारिक रिकॉर्ड में नॉमिनी का विवरण पहले से सही दर्ज होना चाहिए और धान बेचते समय उस नॉमिनी का बायोमेट्रिक सत्यापन भी सफलतापूर्वक पूरा होना अनिवार्य होगा.
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अनिवार्य हुआ एग्रीस्टैक पंजीयन और 3100 रुपये दर निर्धारित
राज्य सरकार ने इस सीजन में धान बेचने के लिए ‘एग्रीस्टैक’ पोर्टल पर पंजीयन कराना पूरी तरह अनिवार्य कर दिया है. एग्रीस्टैक पंजीयन के तहत किसान और उनकी कृषि भूमि का पूरा ब्योरा डिजिटल पोर्टल पर दर्ज किया जाएगा, जिसके बिना धान बेचने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. इस बार भी सरकार ने किसानों से प्रति एकड़ अधिकतम 21 क्विंटल धान खरीदने की सीमा तय की है, और किसानों को उनके धान का मूल्य 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से प्रदान किया जाएगा.

टोकन में दर्ज धान की मात्रा को लेकर जारी हुए कड़े निर्देश
टोकन जारी करने और उसमें धान की मात्रा के निर्धारण को लेकर भी सरकार ने नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं. नियमों के अनुसार यदि किसी किसान को अपनी कुल उपज बेचने के लिए एक से अधिक टोकन मिलते हैं, तो सभी टोकनों में धान की मात्रा बराबर-बराबर बांटी जाएगी. जैसे यदि किसी किसान के पास 120 क्विंटल धान के लिए दो टोकन हैं, तो दोनों टोकन में 60-60 क्विंटल की मात्रा दर्ज होगी. किसानों को चेतावनी दी गई है कि टोकन में दर्ज मात्रा से कम धान लाने पर बची हुई मात्रा स्वतः निरस्त कर दी जाएगी और उसे अगले टोकन में जोड़ने का विकल्प नहीं मिलेगा.
व्यवस्था से बढ़ेगी पारदर्शिता और फर्जीवाड़े पर लगेगी लगाम
प्रशासन का मानना है कि बायोमेट्रिक सत्यापन, एग्रीस्टैक डिजिटल डेटाबेस और टोकन की इन सख्त शर्तों के लागू होने से बिचौलियों और फर्जी तरीके से धान बेचने वाले असामाजिक तत्वों पर पूरी तरह से लगाम लग सकेगी. इसके साथ ही वास्तविक और पंजीकृत किसानों को बिना किसी परेशानी के अपनी फसल का उचित मूल्य समय पर मिल सकेगा. सरकार ने सभी समितियों और खरीदी केंद्रों को इस नई व्यवस्था के सुचारु संचालन के लिए आवश्यक उपकरण व तैयारियां समय रहते पूरी करने के निर्देश जारी कर दिए हैं.


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